सी के पारे रायसेन
सहकारी समितियो के कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है , मुख्य कारण सरकारी नीतियों में खामियां , अकुशल प्रबंधन और वित्तीय अनियमिताएं कर्मचारियों को कम वेतन, विलंबित भुगतान और अस्थिर रोजगार जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, कर्मचारियों को उनकी मेहनत के अनुरूप वेतन नहीं दिया जा रहा है। कई बार वेतन का भुगतान महीनो तक नहीं होता है ,जिससे कर्मचारियों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है ।
सरकार सहकारी संस्थाओं के संचालन में अनावश्यक हस्तक्षेप करती है।जिनसे उनकी वेतन स्वायत्तता प्रभावित होती है। कई बार सरकार द्वारा वेतन बढ़ाने संबंधी आदेश जारी किए जाने के बाद भी जिला स्तर पर उनका पालन नहीं किया जाता है , संस्थाओं में अक्सर प्रोत्साहन की कमी होती है , क्योंकि लाभ का उद्देश्य सीमित होता है। इससे कर्मचारियों के काम करने की प्रेरणा कम होती है और उनकी नौकरी भी सुरक्षित नहीं होती ।कई सहकारी समितियां में धन ॥रूपए पैसे ॥ प्रबंधन का अभाव होता है ,जिससे परिचालन में अक्षमता आती है। प्रबंधन की खराब व्यवस्था के कारण भी समिति कर्मचारियों का शोषण होता है , कुछ मामलों में दलीय राजनीति और भ्रष्टाचार,सहकारी संस्थाओं पर हावी हो जाता है, जिससे कर्मचारियों की स्थिति और भी खराब होती है। सहकारी कर्मचारी राज्य शासन एवं केंद्र शासन की महत्वपूर्ण योजना का भी संचालन भी करते हैं, जैसे किसानों का ऋण वितरण, खाद और राशन वितरण, समर्थन मूल्य पर खरीदी जैसे महत्वपूर्ण काम करते हैं , लेकिन शासन के नियमोंनुसार किसी भी प्रकार का लाभ नहीं दिया जा रहा है।हमेशा कर्मचारियों की उपेक्षा ही की जाती है । इन समस्याओं के कारण कर्मचारीगण अक्सर आंदोलन करने पर मजबूर होते हैं । हड़ताल करने के बावजूद शासन प्रशासन से केवल लिखित आश्वासन ही मिलता है, इस महंगाई के दौर में कर्मचारियों को अल्प वेतन मिलने के कारण से परिवार का भरण पोषण भी सही ढंग नहीं हो पा रहा है। सहकारिता कर्मचारियों का सहकारी संस्थाओं में शोषण समाप्त कर , सहकारी संस्थाओं के कर्मचारियों का वेतन बढ़ाया जाना उचित होगा।