– जगह-जगह ग्रामीणों ने फूलों से किया गया स्वागत
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
बालमपुर के खेड़ापति हनुमान माता मंदिर से लेकर राम दरबार बालमपुर चौराहा तक भव्य कलश यात्रा ढोल नगाड़े और डीजे के साथ यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा में आसपास के गांव के देहरी, भदभदा, बालमपुर घाटी, दीवानगंज, पूछी सहित अन्य गांव के धर्मप्रेमी बंधु उपस्थित हुए। कलश यात्रा खेड़ापति हनुमान माता मंदिर से 51 कलस छोटी छोटी कन्याए और महिलाएं अपने सर पर रखकर कड़ी धूप में नंगे पैर पैदल चलकर गांव के मुख्य मार्गो से होते हुए राम दरबार बालमपुर चौराहा मंदिर पर पहुंची। मां अंबे जी की जयकारे , हनुमान जी की जय कारे लगाते हुए हजारों की तादात भक्तगण नंगे पैर कलशयात्रा मे सम्मिलित हुए। कई भक्तगण डीजे की धुन पर नाचते हुए नजर आए।

कलश यात्रा के समापन के बाद श्रीमद् भागवत कथा का प्रारंभ हुआ जिसमें कथावाचक अंजली शर्मा और पूजा शर्मा द्वारा वर्णन किया गया कि नारद जी के कहने पर पार्वती जी ने भगवान शिव से पूछा कि उनके गले में जो मुंडमाला है वह किसकी है तो भोलेनाथ ने बताया वह मुंड किसी और के नहीं बल्कि स्वयं पार्वती जी के हैं। हर जन्म में पार्वती जी विभन्निा रूपों में शिव की पत्नी के रूप में जब भी देह त्याग करती शंकर जी उनके मुंड को अपने गले में धारण कर लेते पार्वती ने हंसते हुए कहा हर जन्म में क्या मैं ही मरती रही, आप क्यों नहीं।
शंकर जी ने कहा हमने अमर कथा सुन रखी है पार्वती जी ने कहा मुझे भी वह अमर कथा सुनाइए शंकर जी पार्वती जी को अमर कथा सुनाने लगे। शिव-पार्वती के अलावा सर्फि एक तोते का अंडा था जो कथा के प्रभाव से फूट गया उसमें से श्री शुकदेव जी का प्राकट्य हुआ कथा सुनते सुनते पार्वती जी सो गई। वह पूरी कथा श्री शुकदेव जी ने सुनी और अमर हो गए शंकर जी सुखदेव जी के पीछे उन्हें मृत्युदंड देने के लिए दौड़े। शुकदेव जी भागते भागते व्यास जी के आश्रम में पहुंचे और उनकी पत्नी के मुंह से गर्भ में प्रवष्टि हो गए। 12 वर्ष बाद श्री शुकदेव जी गर्व से बाहर आए इस तरह श्री शुकदेव जी का जन्म हुआ।