– दोनों पैर से लाचार होने के बावजूद भी एक-एक कदम आगे बढ़ते हुए भक्त महाकालेश्वर दर्शन के लिए निकला
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
भोपाल विदिशा हाईवे 18 से कई ऐसे भक्त प्रभु के दर्शन करने के लिए निकल रहे हैं उनको देखकर हर कोई व्यक्ति सोचने पर मजबूर हो जाता है। ऐसा ही मामला देखने को शनिवार को मिला जब फैक्ट्री चौराहा दीवानगंज से अंशुल आदिवासी और शंकर विष्णु निवासी पुनीटा जिला हमीरपुर तहसील माधव से पैदल चलते हुए महाकालेश्वर उज्जैन 360 किलोमीटर पैदल चलकर महाकालेश्वर के दर्शन करेंगे। जबकि शंकर विष्णु के दोनों पैर खराब है। मन में आस्था होने के कारण बैसाखी के सहारे एक-एक कदम आगे बढ़ते हुए दर्शन के लिए जा रहे हैं।
पैर से लाचार होने के बावजूद भी बैसाखी के सहारे महाकालेश्वर दर्शन के लिए निकला, जो शारीरिक बाधाओं के बावजूद अपनी अटूट श्रद्धा का प्रतीक है। इस तरह की घटनाएं भक्तों के दृढ़ संकल्प और भक्ति का उदाहरण प्रस्तुत करती हैं, जहां शारीरिक अक्षमता आस्था के आड़े नहीं आ पाती।
यह दर्शाता है कि शारीरिक लाचारी किसी की आध्यात्मिक यात्रा को रोक नहीं सकती, बल्कि ऐसे भक्त अपनी आस्था की शक्ति से बाधाओं को पार करते हैं।
यह घटना किसी एक व्यक्ति की नहीं है, बल्कि ऐसे कई भक्तों की कहानियों का हिस्सा है जो अपनी शारीरिक सीमाओं के बावजूद मंदिर में दर्शन करने के लिए संघर्ष करते हैं।