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मासूमों की शिक्षा जंगल के भरोसे तीन वर्षों से जर्जर भवन वन विभाग के नाके में चल रहा स्कूल और आंगनबाड़ी

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अधिकारीयों की लापरवाही आ रही है सामने

सिलवानी रायसेन ।देश के भविष्य कहे जाने वाले मासूम बच्चे जब वन विभाग के रक्षक आवास में बैठकर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हों और तीन साल से जर्जर स्कूल भवन में कोई सुधार नहीं हो रहा यह हमारे तंत्र की सबसे बड़ी विफलता का प्रमाण है। सिलवानी वन परिक्षेत्र पश्चिम के ग्राम सिमरिया कला में शासकीय प्राथमिक शाला और आंगनबाड़ी की स्थिति आज कुछ ऐसी ही है। सिलवानी मुख्यालय से 32 किलोमीटर दूर बसे इस ग्राम में शासकीय प्राथमिक शाला का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। दीवारों में दरारें छत से गिरती गिट्टियाँ बाहर झांकते लोहे के सरीये और जगह-जगह से टूट चुकी छत इस स्कूल की तस्वीर किसी खंडहर से कम नहीं। हालत इतनी खराब हो चुकी है कि शिक्षक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों को वन रक्षक आवास नाके में बैठाकर पढ़ाने को मजबूर हैं।

वन विभाग का आवास नाका इन स्कूल और आंगनबाड़ी को नोनिहाल बच्चों के लिए वन रक्षक आवास नाका किसी संजीवनी से कम नहीं है
जानकारी के अनुसार वन रक्षक नाके के एक कमरे में स्कूल और दूसरे में आंगनबाड़ी चलाई जा रही है। प्राथमिक शाला में 37 छात्र दर्ज हैं जिन्हें दो शिक्षक पढ़ा रहे हैं। वहीं आंगनबाड़ी में 47 छोटे बच्चे हैं जिन्हें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्रोपती उइके देख रही हैं। ग्राम सिमरिया कला में आंगनबाड़ी भवन भी नहीं है शिक्षक नीलमणि शुक्ला ने बताया कि स्कूल भवन पूरी तरह अनुपयोगी हो चुका है जिसकी सूचना वह लगातार तीन वर्षों से वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र के माध्यम से दे चुके हैं। “स्कूल की छत से एक बार सीलिंग फैन गिर गया था लेकिन सौभाग्य से उस दिन अवकाश था नहीं तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था
ग्रामीण बृजमोहन बरकरे ने बताया तीन साल से भवन की हालत ऐसी ही है। कई बार आवेदन दिए लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।अब तो छत से सरिए भी बाहर आ गए हैं। ग्रामीण जितेंद्र इमने ने भी प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द गांव में नया स्कूल भवन और नई आंगनबाड़ी बनाई जाऐ ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके। यह विडंबना ही है कि एक और देश डिजिटल शिक्षा और स्मार्ट क्लास की बात कर रहा है वहीं सिमरिया कला जैसे गांवों में बच्चे जीवन जोखिम में डालकर वन विभाग की चौकी में पढ़ाई कर रहे हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज कर रहे हैं। बच्चों का भविष्य कब तक ऐसी बदहाल व्यवस्था के भरोसे रहेगा।या फिर इन बच्चों के लिए स्कूल और आंगनबाड़ी भवन बनेगा

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