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पेयजल के लिए प्राकृतिक गड्ढे का सहारा: लोटे से भरना पड़ता है पानी

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धीरज जॉनसन, दमोह

दमोह जिले के हटा तहसील अंतर्गत ग्राम देवरागढ़ी के ग्रामीणों को पीने का पानी लेने के लिए प्रतिदिन नदी किनारे बने प्राकृतिक गड्ढे तक जाना पड़ता है जहां एक लोटे की सहायता वे अपने बर्तनों, डिब्बों को भरते है और फिर घर पहुंचते है। इसका कारण यह है कि गांव में लगे हैंडपंप/ बोर का पानी बेस्वाद और बदबू वाला है इसलिए ग्रामीणों को निकट से बहती नदी और उसके पास प्राकृतिक गड्ढे से पीने का पानी भरना पड़ता है।

जानकारी के अनुसार लगभग 400 की आबादी वाला ग्राम देवरागढ़ी पिछले कई वर्षों से गांव से कुछ दूरी पर दिखाई देते प्राकृतिक गड्ढे से पानी भरता है जिसे वे झिन्ना कहते है, क्योंकि बोर/ हैंडपंप के पानी में स्वाद नहीं है। इसलिए ग्रामीण सुबह और शाम को दो पहिया वाहनो, साइकिल और पैदल जाकर पानी भरते है, जिसमें बच्चे, जवान और महिलाएं भी शामिल रहती है।

हालांकि अब गांव में नल जल योजना की पाइप लाइन बिछने लगी है और ग्रामीणों की उम्मीद जागी है कि समस्या से निजाद मिल सकती है,परंतु कुछ का कहना था कि इसमें अभी समय लग सकता है।वैसे भी ग्रामीण अंचलों में पेयजल के विभिन्न स्रोत होते है अतः उनका रासायनिक और जीवाणु परीक्षण आवश्यक है जिनके परीक्षण के लिए वाटर फील्ड टेस्ट किट होती हैं जिससे दूषित पानी और शुद्धता का परिणाम सामने आ सके,आश्चर्य यह है कि एफकेटी किट से प्रशिक्षण होने के बाद भी बहुत कम रिपोर्ट सामने आती है।

ग्रामीणों ने बताया कि पीने के पानी की समस्या काफी समय से है ट्यूबवेल का पानी, पीने लायक नहीं है।खाना बनाते समय दाल भी नहीं पकती है।अब नल जल योजना अंतर्गत पाइप लाइन बिछ रही हैं।देखते हैं कब तक इसका कार्य पूर्ण होगा।अभी तो देवरा और भटदेवा के बीच एक झिन्ना है गांव वाले वही से पानी लाते है एक छोटा लोटा ले जाते है उससे ही पानी भरते है जो गड्ढे से झिर कर आता है। गांव में कहीं कहीं खेत के बोर का पानी कुछ ठीक है, परंतु पीने का पानी तो यही से भरते है।बाकी इस्तेमाल का पानी गांव में मिल जाता है।

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