धीरज जॉनसन की रिपोर्ट
दमोह। ऐतिहासिक महत्व की धरोहरों से भरपूर जिले के ग्रामीण अंचलों में आज भी प्राचीन कलाकृतियां,लिपि,शिलालेख,भग्नावशेष दिखाई देते है जो भूतकाल की समृद्धता को प्रदर्शित करते है शहर से लगभग 38 किमी दूर सुन्न नदी के पास ग्राम नयागांव में भी पुरानी कलाकृति,लिपि व मूर्तियां दिखाई देती है हालांकि इस जगह को बेहतर भी किया गया है पर इसके पास खेत में भी दो नक्काशीदार पत्थर दिखाई देते है।

यहां दो बड़े पत्थरों पर नक्काशीदार मूर्तियां बनी हुई है इस चीरे में कुछ लिपिबद्ध भी है पर अस्पष्ट है परंतु इस गांव का जिक्र दमोह के डिप्टी कमिश्नर राय बहादुर हीरालाल द्वारा 1919 में लिखित दमोह – दीपक से भी प्राप्त होता है जहां उल्लेखित है कि ठर्रका दमोह तहसील में दमोह से १५ मील आग्नेय में वीरान मौजा है,अब प्राचीन गाँव से कुछ दूर पर नयागाँव नाम का एक गाँव बस गया है। प्राचीन बस्ती की जगह कई सती के चीरे हैं। एक संवत् 1570 का है। उसमें श्री गढ़गौरि विषय दुर्गे महाराज श्रीराजा आम्हणदास देव के समय का जिक्र है और ग्राम का नाम ठर्रक लिखा है। दूसरा लेख सन् 1571 का है। उसमें भी आम्हणदास का नाम लिखा है। आम्हणदास गोंड़राजा संग्रामशाह का मूल नाम था। तीसरा लेख सं.1727 का और चौथा 1736 का है। अंतिम लेख में श्रीराजा छत्रशाह का नाम लिखा है। स्थानीय निवासी रूपनारायण बताते है कि पहले यहां मेला भी भरता था और आज भी श्रद्धालु यहां आते है।
न्यूज स्रोत:धीरज जॉनसन