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बैरखेड़ी चौराहे पर चल रही भागवत कथा के छठवें दिन कथा वाचक ने गोवर्धन पर्वत की पूजा और श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह कथा सुनाई

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मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन

भोपाल विदिशा हाईवे 18 पर स्थित पर बैरखेड़ी चौराहे पर भागवत कथा के छठवें दिन कथा वाचक आचार्य पंडित सुबोध कांत कपिल ने गोवर्धन पर्वत की पूजा और रुक्मणी विवाह का वर्णन विस्तार पूर्वक किया और कहां की
वृंदावन वासी अच्छी फसल के लिए इंद्र देवता की पूजा किया करते थे, और धूमधाम से उत्सव मनाया जाता था। इंद्र को अपनी शक्तियों और पद पर घमंड हो गया। जिसे नष्ट करने के लिए श्रीकृष्ण ने एक लीला रची। श्रीकृष्ण ने नगरवासियों को समझाया कि गोवर्धन पर्वत की उपजाऊ धरती के कारण ही वहां पर घास उगती है, जिसको उनके गाये, बैल, व पशु चरते हैं। जिसके बाद उन्हें उनसे दूध मिलता है, साथ ही वह खेत जोतने में मदद करते हैं। उन्होंने इंद्र की पूजा छोड़कर गोवेर्धन की पूजा करने को कहा। श्रीकृष्ण की बात मानकर बृजवासियों ने इंद्र की पूजा बंद कर गोवर्धन की पूजा शुरू की, जिससे इंद्र क्रोधित हो गए। वृन्दावन पर मूसलधार बारिश शुरू कर दी। इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए श्री कृष्ण ने अपने बाएं हाथ की कनिष्ठ अंगुली पर पूरे गोवर्धन पर्वत को उठा लिया। आगे कहां की भगवान श्रीकृष्ण रुक्मणी के विवाह की झांकी ने सभी को खूब आनंदित किया। रुक्मणी विवाह के आयोजन ने श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। इस दौरान कथा मंडप में विवाह का प्रसंग आते ही चारों तरफ से श्रीकृष्ण-रुक्मणी पर जमकर फूलों की बरसात हुई।


कथावाचक ने भागवत कथा के महत्व को बताते हुए कहा कि जो भक्त प्रेमी कृष्ण-रुक्मणी के विवाह उत्सव में शामिल होते हैं उनकी वैवाहिक समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है। कथा वाचक ने कहा कि जीव परमात्मा का अंश है। इसलिए जीव के अंदर अपार शक्ति रहती है। यदि कोई कमी रहती है, तो वह मात्र संकल्प की होती है। संकल्प एवं कपट रहित होने से प्रभु उसे निश्चित रूप से पूरा करेंगे उन्होंने महारास लीला श्री उद्धव चरित्र, श्री कृष्ण मथुरा गमन और श्री रुक्मणी विवाह महोत्सव प्रसंग पर विस्तृत रुप से कथा सुनाई। बुधवार को कथा का आखिरी दिन होने पर महायज्ञ की पूर्णाहुति की समाप्ति पर विशाल भंडारे का आयोजन होगा जिसमें आसपास के गांव जैसे दीवानगंज, अंबाडी, सेमरा, बेरखेड़ी चौराहे, बालमपुर, कचनारिया, लंबा खेड़ा, सरार, गिदगड, मुस्काबाद, सत्ती, बांसिया, पिपरई, मुनारा, खोह, सायर ,बामोरा, सहित 50 गांव के ग्रामीण प्रसाद के रूप में भोजन ग्रहण करेंगे।

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