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कड़कड़ाती ठंड में किसान सुबह 6 बजे से ही खाद लेने  सोसाइटी पहुंच रहे,लेकिन नही मिल पाता है खाद

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मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन

डीएपी की किल्लत से किसान अभी उबर नहीं पाए तब तक यूरिया खाद ने रुलाना शुरू कर दिया है। ऐसा ही मामला रायसेन जिले के दीवानगंज सोसाइटी में देखने को मिला है। जहां 15 से 20 नवंबर को बुआई गई गेहूं की फसल में पहली सिंचाई के बाद यूरिया का डोज देने की जरूरत है। लेकर सोसाइटी के गोदामों से यूरिया के दो कट्टे पाने के लिए किसानों को कड़ाके की ठंड में परेशान होना पड़ रहा है। इधर किसानों का कहना है कि बोवनी के समय डीएपी खाद मुश्किल से मिली और अब यूरिया के लिए मशक्कत करना पड़ रही है।
जनवरी महीने में 600 टन यूरिया की जरूरत है। कब यूरिया आएगी और किसानों को कब मिलेगी इसका कोई शैड्यूल घोषित नहीं है। जबकि किसान आज की तारीख में यूरिया खाद से गेहूं की 30 से 20 दिन अवधि की फसल की टॉप ड्रेसिंग करना चाहता है। और यूरिया है कि किसान को सहजता से नहीं मिल रही। यूरिया पाने के लिए किसान 20 से 25 किमी दूर गांव से सुबह 6 बजे दीवानगंज सोसाइटी पर कतारबद्ध हो रहा है। रवी फसल के सीजन में बैकफुट पर रहें हैं। किसानों को खाद के लिए कड़ी मशक्कत करना पड़ी है। गेहूं ,चने ,सरसों की बोवनी के समय किसानों को समय पर डीएपी खाद नहीं मिली। चूंकि प्राइवेट डीलरों की दुकान पर यूरिया का कट्टा 100 रुपए महंगा मिल रहा है इसलिए किसान सरकारी गोदाम से ही यूरिया लेने के लिए पसीना बहा रहा है।


बता दें कि दीवानगंज सोसाइटी में हर साल 800 टन यूरिया और 600 टन डीएपी लगता है मगर इस साल अभी तक 400 टन यूरिया और 300 टन डीएपी खाद्य उपलब्ध हो सका, किसान बाहर से खाद लेने को मजबूर हो रहे हैं। दीवानगंज सोसाइटी में इन दिनों किसान खाद के लिए बार-बार चक्कर काटते हुए दिखाई दे रहे हैं। बड़ी संख्या में किसान खाद के लिए कड़कड़ाती ठंड में सुबह 6 बजे से ही आकर खड़े जाते हैं। एक कॉपी के पेज में जैसे जैसे किसान आता है उसका सीरियल से नाम लिख दिया जता है। किसान दिन भर सोसाइटी में बैठकर शाम को घर चला जाता है मगर खाद उपलब्ध नहीं हो पाता है। बावजूद इसके उन्हें समय से खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है ।जिसके कारण किसानों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है किसान खाद के लिए इधर उधर भटक रहे हैं। फिर भी खाद नहीं मिल पाता है।
वैसे तो किसान धरती का भगवान कहा जाता है लेकिन किसान दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर हैं। वह समय पर नहीं मिल पा रही है। किसान को भगवान इसलिए कहा जाता है क्योंकि वह अनाज उगाता है, जिससे सभी का पेट भरता है। लेकिन दीवानगंज क्षेत्र के हालात किसानों के लिए बेहद खराब हैं। आलम यह है कि किसान डीएपी खाद के लिए सुबह 6 बजे से आकर सोसाइटी के सामने खड़े हो जाते हैं। जैसे ही सोसाइटी खुलता है तो किसान खाद के लिए परेशान होते रहते हैं।

इनका कहना हे 
मैं 15 दिन से खाद के लिए चक्कर लगा रहा हूं इसके बावजूद भी खाद नहीं मिल पा रहा है हम सभी किसान सुबह 6 बजे से समिति के सामने आकर बैठ जाते हैं।
सुरेश लोधी नरखेड़ा 
हम सुबह 6 बजे से आकर सीरियल से सभी किसानों के नाम लिख लेते हैं क्योंकि जैसे ही खाद का ट्रक आएगा तो हमें खाद मिल जाएगा मगर इसके बावजूद भी सोसाइटी में खाद नहीं आता और हम दिनभर बैठकर निराश होकर शाम को घर वापस चले जाते हैं।
प्रीतम सिंह, कुंदन सिंह किसान सेमरा

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