मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
हादसे, दुर्घटना या अन्य कारणों से पीड़ित मरीज को स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाने के लिए क्षेत्र में संचालित 108 एम्बुलेंस वाहनों की हालत खराब है। वे इतने ‘बीमार’ हैं कि इन पर तैनात स्टाफ को वाहन की सेहत की ही चिंता लगी रहती है। दूसरी ओर अस्पताल जा रहे मरीज भी एम्बुलेंस की हालत देखकर प्रार्थना करते रहते हैं कि सही सलामत समय से अस्पताल पहुंच जाएं। दीवानगंज क्षेत्र में जननी 108 एम्बुलेंस और इमरजेंसी 108 एम्बुलेंस रहती है जिसमें से जननी 108 एंबुलेंस ज्यादातर प्रसव वाली महिलाओं को लाने ले जाने में व्यस्त रहती है। जबकि दूसरी एमरजैंसी एम्बुलेंस 18 दिन से खराब पड़ी हुई है अगर ऐसे में हाईवे पर दुर्घटना होती है मरीज के लिए रायसेन या सांची से 108 एम्बुलेंस बुलाना पड़ती है। 25 से 30 किलोमीटर दूर से आने में एंबुलेंस को काफी समय लग जाता है इतने समय में दुर्घटना में घायल व्यक्ति की जान पर बन आती है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 108 एम्बुलेंस अधिकांश वाहन जर्जर हो गए हैं। इस कारण आए दिन इनमें सुधार कार्य कराना पड़ रहा है। पूरी तरह सही नहीं होने और सड़क पर दौड़ने के कारण चालक व स्टाफ वाहन रास्ते में खड़ा होने व हादसे के डर से सहमे रहते हैं।
दीवानगंज क्षेत्र के अस्पताल में तैनात इमरजेंसी 108 एम्बुलेंस लगभग दो लाख किमी का सफर तय कर चुकी हैं। इनमें कुछ वाहन तो ऐसे हैं जो शासन के नियमानुसार उपयोग के लायक ही नही बचे हैं। दरअसल, वाहनों के लिए किलोमीटर तय हैं। निर्धारित किमी का सफर तय करने के बाद वाहन का उपयोग नहीं किया जाता है किंतु तय सीमा से ज्यादा सफर तय करने वाले वाहनों का उपयोग भी क्षेत्र में किया जा रहा है। वाहनों पर तैनात पायलट और ईएमटी द्वारा इनका संचालन करने वाली कंपनी के अफसरों को कई बार वाहनों की हालत की जानकारी दे दी गई है। इसके बावजूद खराबी दूर करने के साथ जर्जर वाहनों को नहीं बदला जा रहा है। दीवानगंज क्षेत्र चलने वाली इमरजेंसी एंबुलेंस क्रमांक सीजी 04 एन वी 6359 18 दिन से वर्कशॉप पर सुधारने क लिए खड़ी हुई है। जो आज तक ठीक नहीं हुई है दूसरी तरफ इमरजेंसी 108 एम्बुलेंस का गेट भी तार के सहारे बंद होता है जब तक तार नहीं खींचते एंबुलेंस का गेट खुलता और बंद नहीं होता है।