मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
भोपाल विदिशा हाईवे 18 पर स्थित दीवानगंज फैक्ट्री चौराहे दीवानगंज गिरिराज गार्डन में रविवार को श्री कृष्ण की आरती के पश्चात 56 प्रकार की मिठाइयों का भोग लगाया गया। भोग से पहले गांव की छोटी-छोटी कन्याएं, महिलाएं और पुरुष ने अपनी थाली सजा कर, उसमें कई प्रकार के पूजा पाठ सामग्री रखकर फैक्ट्री चौराहे दीवानगंज गिरिराज गार्डन पर पहुंचे। दीवानगंज निवासी बृजेश खंडेलवाल द्वारा हर साल गिरिराज गार्डन पर श्री कृष्ण को 56 प्रकार की मिठाइयों को भोग लगाकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस आयोजन का यह चौथा वर्ष है। गिरिराज की आरती से पहले बृजेश खंडेलवाल ने भक्तगणों को बताया कि श्री कृष्ण को 56 प्रकार की मिठाइयों का भोग क्यों लगाया जाता है उन्होंने कहा कि पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार ब्रज के लोग स्वर्ग के राजा इंद्र की पूजा के लिए एक बड़ा आयोजन कर रहे थे. छोटे कृष्ण ने नंद बाबा से पूछा कि यह आयोजन क्यों किया जा रहा है. तब नंद बाबा ने कहा कि इस पूजा से देवराज इंद्र प्रसन्न होंगे और उत्तम वर्षा करेंगे. नन्हें कृष्ण ने कहा कि वर्षा तो इंद्र का काम है, उसकी पूजा क्यों करें? अगर पूजा करनी है तो गोवर्धन पर्वत की पूजा करें क्योंकि इससे फल और सब्जियां प्राप्त होती हैं और जानवरों को चारा मिलता है. तब छोटे कृष्ण की बात सभी को पसंद आई और सभी लोग इंद्र की जगह गोवर्धन की पूजा करने लगे. इंद्र देव ने इसे अपना अपमान समझा और क्रोधित हो गए. क्रोधित इंद्र देव ने ब्रज में कहर बरपाया और भारी बारिश कराई और पूरे शहर में हर तरफ पानी ही पानी नजर आने लगा. ऐसा दृश्य देखकर ब्रजवासी भयभीत हो गए, तब छोटे कृष्ण ने कहा कि गोवर्धन की शरण में जाओ, वही हमें इंद्र के प्रकोप से बचाएंगे. कृष्ण जी ने पूरे गोवर्धन पर्वत को अपने बाएं हाथ की उंगली से उठा लिया और सभी से कहा कि सब लोग अपने अपने घर पर जो भी बना है या रखा है। वह लाकर गिरिराज पर्वत को भोग लगाओ सभी लोग अपने-अपने घरों से जो भी उनके पास था सब लाकर गिरिराज पर्वत को भोग लगाया। यह सभी 56 प्रकार के भोग थे तभी से श्री कृष्ण को 56 प्रकार की मिठाइयों का भोग लगाना प्रारंभ हो गया। श्री कृष्ण जी की आरती से पहले 4 आरती हुई इसके पश्चात पांचवी आरती श्री कृष्ण एवं गिरिराज की गई। गिरिराज की आरती करते समय ढोल नगाड़े और गायक कलाकार द्वारा पूरी रीति रिवाज से आरती की गाई गई। आरती करने के पश्चात श्री कृष्ण जी को छप्पन प्रकार की बनाई गई मिठाई का भोग पंडित जी द्वारा लगाया गया। भोग और आरती के पश्चात सभी भक्तगणों को प्रसाद वितरण साथ ही भोजन के रूप में सभी भक्तगणों ने प्रसाद ग्रहण किया।