मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति स्थापित कर लोग पूजा करते हैं। ये मूर्ति पूरे साल रहती है और अगले साल नई मूर्ति लाकर पूजा की जाती है। दिवाली, दीपावली या दीपोत्सव हिंदू धर्म का सबसे बड़ा त्योहार है, जोकि पूरे 5 दिनों तक चलता है। इस दिन लक्ष्मी-गणेश की एक साथ पूजा करने का विधान है। दिवाली की शाम घर, दुकान, ऑफिस से लेकर कारखाने आदि जगहों पर लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति स्थापित की जाती है।
ग्राम अंबाडी में पूरे साल कारीगर नई नई मूर्तियों का निर्माण करते है। जब जैसी जैसी मूर्ति की आवश्यकता होती है। कारीगर हर प्रकार की मूर्ति का निर्माण कर मार्केट में बेचते हैं। यहां उनका पुश्तैनी धंधा है। अंबाड़ी निवासी हल्के राम प्रजापति, अमन प्रजापति ,राहुल प्रजापति ,विक्की ,छोटू प्रजापति , प्रताप प्रजापति ने बताया की दीपावली पर दिया और लक्ष्मी जी की मूर्ति का निर्माण करते है। अभी लक्ष्मी जी की मूर्ति पर रंग रोगन का कार्य किया जा रहा है।
हर साल दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की नई मूर्ति खरीदी जाती है। दिवाली के दिन नई मूर्ति में पूजा-अनुष्ठान करने के बाद यह मूर्ति पूरे साल स्थापित रहती है और पुरानी मूर्ति का विसर्जन कर दिया जाता है। दिवाली में लक्ष्मी-गणेश की वही मूर्ति नई खरीदी जाती है जोकि मिट्टी से बनी होती है। सोना, चांदी या पीतल जैसे धातुओं की मूर्ति को नहीं बदला जाता है। वहीं आमतौर पर जब गणेशोत्सव या दुर्गोत्सव में देवी-देवताओं की मूर्ति स्थापित होती है तो उसका विसर्जन दस दिनों में कर दिया जाता है। लेकिन दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की स्थापित मूर्ति पूरे साल रहती है।
दरअसल प्राचीन काल में मिट्टी से बनी मूर्तियों में पूजा करने का अधिक प्रचलन था। जो सालभर रखने के बाद खंडित, खराब या बदरंग सी हो जाया करती थी।
इसलिए दिवाली के शुभ मौके पर मूर्ति का विसर्जन कर नई मूर्ति लाई जाती थी। इसके बाद से दिवाली पर हर साल नई मूर्ति खरीदने की परंपरा की शुरुआत हो गई।