रामचरितमानस हमें जीवन जीने की कला सिखाती है- मानस आचार्य
उदयपुरा रायसेन। शिव हनुमान मंदिर पर मानस यात्रा अंतर्गत सत्संग, सेवा, सुमिरन का कार्यक्रम आयोजित किया गया, आयोजक मंदिर पुजारी रामस्वरूप शर्मा एवं परिजनों द्वारा मानस प्रवक्ताओं का तिलक चंदन लगाकर स्वागत किया, आयोजित सत्संग सभा में मानस आचार्य सुरेंद्र शास्त्री ने मानस प्रसंग, शिव जी द्वारा सती का त्याग एवं शिवजी की समाधि
कथा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अपनी करनी के पश्चाताप से ही व्यक्ति निष्पाप होता है, शिवजी की समाधि सहज रूप को प्रकट करती है ,जीवन में सहजता से ही शांति प्राप्त होती है, आज व्यक्ति असहजता का जीवन जीने से ही अशांति एवं दुख प्राप्त कर रहा है, रामचरितमानस ग्रंथ की कथाएं हमें सहज जीवन जीने की कला सिखाती हैं।

सभा में प्रसंग अनुसार सुंदर भाव, धर्माधिकारी राजेंद्र शास्त्री, नर्मदा प्रसाद रामायणी, अमरनाथ छोटे महाराज, हरिदास संगीताचारय, कुंवर लाल रामायणी, कैलाश दुबे ,योगेश शास्त्री ने भी रखें, सत्संग सभा का संचालन चतुरनारायण अधिवक्ता ने किया ,उपस्थित विद्वानों एवं श्रोताओं का आभार मंदिर समिति अध्यक्ष गोपाल वर्मा ने माना, मानस ग्रंथ की मंगल आरती में अभिभाषक मंडल अध्यक्ष राजेश कटारे, कैलाश शर्मा, जे के टेकाम, राजकुमार चौहान ,संतोष शर्मा, डीपी पाठक, नर्मदा प्रसाद, सीताराम धाकड़ ,ओंकार सिंह ,राजेंद्र गुप्ता, शिवदयाल बड़कुर, फूल सिंह धाकड़, हरि गोविंद लोधी, पवन शर्मा, रामबाबू शर्मा, मूरत सिंह लोधी, भैया जी विश्वकर्मा, देवी प्रसाद साहू, वीरेंद्र पटेल, छोटेलाल कौरव, निर्भय मेहरा, संदीप, प्रशांत रघुवंशी, दुर्गेश शर्मा, सहित बड़ी संख्या में मानस प्रेमी जनों ने भाग लेकर प्रसाद ग्रहण किया,