क्या मोहन राज में अतिथि विद्वानों की जगेगी किस्मत,सूबे के सरकारी महाविद्यालय वर्षों से अतिथि विद्वानों के भरोसे
भोपाल।सूबे के सरकारी कॉलेजों में पिछले दो दशकों से रिक्त पदों के विरुद्ध सेवा देते आ रहे अतिथि विद्वानों की क्या मोहन राज में किस्मत खुलेगी???।आज यह यक्ष प्रश्न आम जन मानस में चर्चा का विषय बना हुआ है।आलम ये है कि पिछले कई वर्षो से अतिथि विद्वान अपने नियमितीकरण के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।सरकारें आई गई और अतिथि विद्वानो के मुद्दे पर ही बनी बिगड़ी लेकिन अतिथि विद्वानो का भविष्य सुरक्षित नही हो पाया।कई अतिथि विद्वान तो नियमितीकरण की आस में काल कवलित भी हो गए।पिछले चुनाव से पहले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने महापंचायत बुलाकर फिक्स वेतन एवं 65 वर्ष तक कार्यरत अतिथि विद्वानो को बाहर नही किया जाएगा,ये सरकार के कर्मचारी हुए लेकिन विभागीय आदेश ने मोहन यादव एवं शिवराज की घोषणा पर पानी फेर दीया जिसकी काफ़ी आलोचना भी हुई।अब देखना है आने वाले समय मे क्या अतिथि विद्वानों का भविष्य सुरक्षित कर पाती है सरकार।
अतिथि विद्वान महासंघ ने शासन प्रशासन को लिखा पत्र
वहीं अतिथि विद्वान महासंघ ने शासन प्रशासन को पत्र लिखा है एवं अपनी वर्षों पुरानी फिक्स वेतन एवं 65 वर्ष तक सेवा जारी रखने की मांग दोहराई है।साथ ही महापंचायत में कई गई पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान मुख्यमंत्री के 50 हज़ार फिक्स वेतन एवं 65 वर्ष तक विद्वानों को बाहर नही किया जाएगा जिन पद में है वो उन्ही की रहेगी आदि घोषणाएं पूरी करने का अनुरोध भी किया है।
NEP में है वर्कलोड,अतिथि विद्वानों को मुख्यधारा में जोड़ने से कई समस्याओं का हो सकता है निदान
आज नई शिक्षा नीति में वर्कलोड काफ़ी बढ़ गया है जिसके कारण पठन पाठन प्रभावित हो रहा है।एवं रिसर्च भी प्रभावित हो रहा है।रिक्त पदों के विरुद्ध सेवा देने वाले जो पीएचडी डिग्री धारी अतिथि विद्वान है उनको गाइड,प्रोजेक्ट/सेमिनार हेड आदि बनाया जाए तो काफ़ी समश्या का निराकरण हो जाएगा क्योंकि अतिथि विद्वान योग्य एवं अनुभवी हैं।हजारों असिस्टेंट प्रोफेसर अभी पीएचडी है ही नहीं तो वो गाइड रिसर्च प्रोजेक्ट हेड बन ही नहीं सकते।
इनका कहना हे –
अतिथि विद्वान महासंघ ने शासन प्रशासन को पत्र लिख कर निवेदन किया है कि जो भी घोषणा महापंचायत में की गई थी कि अतिथि विद्वानों को 50 हजार फिक्स वेतन एवं 65 वर्ष तक इनके पदों को भरा मानते हुए सेवा जारी रखी जाएगी इसको मानवीयता संवेदनशीलता के साथ आदेश जारी करें जिससे अतिथि विद्वानों के साथ न्याय हो सके।
–डॉ देवराज सिंह,प्रदेश अध्यक्ष, महासंघ
प्रदेश के मूल निवासी उच्च शिक्षित अतिथि विद्वानो के साथ न्याय करे सरकार।प्रवेश,प्रबंधन,अध्यापन,नैक,रूसा,मूल्यांकन,परीक्षा आदि समस्त कार्य अतिथि विद्वान ही करते हैं फिर भी भविष्य सुरक्षित नहीं।फिक्स वेतन एवं जिन पदों पर विद्वान सेवा दे रहे हैं उन्ही पर समायोजन किया जाना चाहिए।
-डॉ आशीष पांडेय,मिडिया प्रभारी।