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दैवियां हमारे जीवन में नौ दिन के लिए नहीं बल्कि सदा के लिए परिवर्तन चाहती हैं- ब्रह्माकुमारी रुक्मिणी दीदी

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विदिशा। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय मनसा पूर्ण हनुमान मंदिर के पास स्थित सेवा केंद्र द्वारा चैतन्य देवी झांकी का आयोजन किया गया। प्रदेश उपाध्यक्ष मानव अधिकार एवं सामाजिक न्याय आयोग लायन अरुण कुमार सोनी ने बताया कि जिसमें ब्रह्माकुमारी रेखा दीदी ने अपने विचार व्यक्त किये। जिसमें आपने कहा कि हमारे अंदर जो असीम गुण और शक्तियां विराजमान है। उन्हें हम राजयोग के माध्यम से विकसित कर हमारा जीवन भी देवियों की तरह दिव्य और सभी दैवी शक्तियों से भरपूर कर सकते है। यह नवरात्रि पर्व सिर्फ उत्सव का पर्व ना होकर उत्सव के साथ साथ अपने जीवन को दैवी शक्ति से भरपूर करने का उत्सव है। ब्रह्माकुमारी रुकमणी दीदी ने चैतन्य देवियों का अध्यात्मिक अर्थ बताते हुए कहा कि नवरात्रि का पर्व सभी के जीवन में एक अहम भूमिका निभाता है। पर्व की महत्ता इस हद तक है कि लोग नौ दिन तक संपूर्ण पवित्र रहते, संपूर्ण सात्विक भोजन करते हुए घर में अशुद्धि का पूर्णतया बहिष्कार करते हैं। निश्चित ही कितना महत्वपूर्ण त्यौहार इसको माना जा सकता है जो जीवन परिवर्तनीय है। आप अपने जीवन से इन बुराइयों को सदा के लिए दूर क्यों नहीं कर सकते। देवियां सिर्फ नौ दिन के लिए हमें इन बुराइयों से व्रत नहीं सिखाती है।दैवियां हमारे जीवन में नौ दिन के लिए नहीं बल्कि सदा के लिए परिवर्तन चाहती हैं। इस कलयुगी रूपी रात्रि में खुद को जगाने से ही और अपनी शक्तियों को जगाने से ही हम उस देवी स्वरूप दुर्गा, काली, गायत्री, कात्यायिनी, चंद्रघंटा आदि माताओं के जैसा बन पाएंगे। जितनी भी देवियों के नाम हैं सारे ही या तो गुणवाचक है या कर्तव्य वाचक हैं। किसी ना किसी गुण व विशेषता के आधार से उस देवी का नामकरण किया गया तो विशेषताएं सारी आपकी हैं वह परिस्थितियों सारी आपकी हैं। जिन माताओं कन्याओं द्वारा परमात्मा के ज्ञान को चारों और फैलाया गया उसका प्रचार- प्रसार हुआ, उसकी यादगार आज नवरात्रों में कन्या को पूजना, उनको भोग खिलाना, उसके पैर आदि धोना है समाज उन्हीं धारणाओं को याद रखता है जिसको कभी ना कभी हमने किया है। जितनी भी अर्चन, पूजन और गायन की विधियां हैं। वो परमात्मा द्वारा किए गए कार्यों की यादगार ही है। सिर्फ बिना अर्थ त्योहार मनाना उस त्योहार के साथ पूर्णता न्याय ना होना है। अतः बुराइयों को सदा के लिए स्वयं के जीवन से छोड़ना ही सच्ची नवरात्रि मनाना है। दैवी भक्तों ने कहा ऐसी जीवंत झांकी हमने अपने जीवन में पहली बार देखी , साथ साथ उन्होंने ब्रह्माकुमारी बहनों की बहुत प्रशंसा करते हुए कहा की , ब्रह्माकुमारी बहने ऐसे अलौकिक कार्यक्रम का आयोजन करके हमारे समाज में एक नई जागृति लाने का तथा समाज को सकारात्मक दिशा देने का महान कार्य कर रही है। चैतन्य झांकी देख अभिभूत होकर उन्होंने कहा की हम भी राजयोग का अभ्यास कर स्वयं को आत्म सशक्त करेंगे एवं सभी को आत्म सशक्त होने के लिए जागरूक करेंगे। अनु दीदी ने कहा की ऐसी झांकी से हमारे भारत देश की संस्कृति कितनी ऊंची है। उसका पता चलता है। इसलिए हमें अपने महान संस्कृति का मान रखकर राजयोग के अभ्यास का दैनिक जीवन में उपयोग करना चाहिए।हजारों भाई- बहनों ने चैतन्य देवियों के दर्शन कर पुण्य का लाभ लिया।

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