-भारत में जल चिकित्सा एक हज़ार साल पहले भोपाल में प्रचलित थी
भोपाल । शासकीय बाबूलाल गौर भेल महाविद्यालय में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी ‘विश्व स्वास्थ्य दिवस पर कार्यशाला आयोजित की गई ।कार्यशाला का विषय “रोल ऑफ हाइड्रो थेरेपी इन मेंटेंनिंग हेल्थ एंड न्यूट्रीशन” था।कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ बृजेश चौरे हाइड्रोथैरेपिस्ट, सुश्री अलका गंगवार न्यूट्रीशन काउंसलर न्यूट्रीचार्ज और श्री एस पी सिंह, न्यूट्रीशन काउंसलर न्यूट्रीचार्ज ख़ास तौर पर उपस्थित थे। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर संजय जैन ने बताया कि भोपाल में एक हज़ार साल से जल चिकित्सा का लाभ नागरिकों को मिलता था ।

जल विशेषज्ञ श्री बृजेश चौरे ने अपने संबोधन में कहा कि हाइड्रो थेरेपी का मानव स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर को सामान्य बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका है।इंसान के शरीर में लगभग 60 से 75% जल होता है। उन्होंने बताया कि शुद्ध जल के प्रयोग से हम सभी प्रकार की बीमारियों को नियंत्रित कर सकते हैं। जल के पी एच याने उसके अम्लीय और क्षारीय अनुपात में परिवर्तन करके जानलेवा बीमारियों से बच सकते हैं। उन्होंने विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जल एवं कार्बोनेटेड ड्रिंक के पी एच का परीक्षण करके बताया कि कार्बोनेटेड ड्रिंक्स मानव स्वास्थ्य के लिए कितने घातक हैं। बाज़ार में बिकने वाले लगभग सभी शीतल पेय इस श्रेणी में आते हैं

न्यूट्रीचार्ज की पोषण सलाहकार सुश्री अलका गंगवार ने बताया कि शुद्ध भोजन और शुद्ध जल के बिना हम सेहतमंद नहीं रह सकते । अगर स्वस्थ रहना है तो अपने भोजन में ताजे फलों एवं सब्जियों का उपयोग पर्याप्त मात्रा में करना अत्यंत आवश्यक है।
संस्था के न्यूट्रीशन काउंसलर श्री एस पी सिंह ने जानकारी दी कि हम भोजन को जितनी कम बार गरम करेंगे, हमारे स्वास्थ्य के लिए भोजन उतना ही लाभप्रद होगा। उन्होंने भी शुद्ध भोजन के साथ शुद्ध जल की मात्रा के महत्व को बताया।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर संजय जैन ने बताया कि मध्यप्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य दिवस पर सात से 21अप्रैल तक पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने के लिए विभिन्न गतिविधियों के आयोजन का निर्णय लिया गया है। इस दौरान भेल महाविद्यालय में भी 21अप्रैल तक स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। प्राचार्य ने बताया कि भारत में जल चिकित्सा प्रणाली बहुत पुरानी है और एक हज़ार वर्ष पहले से जल चिकित्सा के प्रमाण मिलते हैं । भोपाल की ऐतिहासिक बड़ी झील के निर्माता राजा भोज थे ।वे जल चिकित्सा के जानकार थे ।उन्होंने एक हज़ार साल पहले जल मंगल जैसा बेजोड़ ग्रंथ लिखा था ।इस ग्रंथ में साफ और शुद्ध जल से अनेक रोगों के इलाज का विवरण मिलता है । इसका अर्थ यह कि उस काल में लोग शुद्ध जल के ज़रिए इलाज की तकनीक से परिचित थे ।

महाविद्यालय के क्लीनिकल न्यूट्रीशन विभाग की विभागाध्यक्ष एवं स्वास्थ्य पखवाड़े के दरम्यान होने वाली गतिविधियों की संयोजक डॉक्टर मीता बादल ने बताया कि “विश्व स्वास्थ्य दिवस 7 अप्रैल” को इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ‘मेरा स्वास्थ्य मेरा अधिकार’ थीम पर मनाने का निर्णय लिया है। यह भारत में प्रत्येक देशवासी का मौलिक अधिकार है और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य की देखभाल पर ज़ोर देता है।
कार्यशाला का आयोजन महाविद्यालय के क्लीनिकल न्यूट्रीशन विभाग द्वारा किया गया । कार्यशाला में प्राध्यापक डॉ अर्चना जैन डॉक्टर समता जैन, डॉक्टर अंजना अग्रवाल , क्रीड़ा अधिकारी श्रीमती सुषमा तिवारी, अतिथि विद्वान प्रियंका विश्वकर्मा के साथ महाविद्यालय परिवार के सारे सदस्य उपस्थित थे। छात्र-छात्राओं ने भी उत्साह पूर्वक भागीदारी की।
न्यूज़ सोर्स- डॉक्टर मीता बादल