आगे नंबर प्लेट, पीछे गायब पहचान! शहर में बेखौफ दौड़ रही बुलेरो, आम आदमी पर सख्ती और शराब वाहन पर नरमी के सवाल
विनोद साहू बाड़ी रायसेन
एक ओर मध्यप्रदेश सरकार शराब से हर साल करोड़ों रुपये का राजस्व अर्जित कर रही है, वहीं दूसरी ओर पुलिस और प्रशासन समय-समय पर नशामुक्ति अभियान चलाकर समाज को नशे से दूर रहने का संदेश देते हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इन अभियानों की गंभीरता पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है।
क्षेत्र में इन दिनों एक बुलेरो वाहन चर्चा का विषय बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार एमपी 04 जेडजी 1211 नंबर की यह बुलेरो कथित रूप से शराब की पेटियां गांव-गांव पहुंचाने के काम में लगी हुई है। खास बात यह है कि वाहन के अगले हिस्से पर तो रजिस्ट्रेशन नंबर अंकित है, लेकिन पीछे की नंबर प्लेट गायब बताई जा रही है। इसके बावजूद वाहन शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बेखौफ घूमता नजर आता है।
लोगों का कहना है कि यदि किसी आम नागरिक की मोटरसाइकिल पर नंबर प्लेट न हो तो उसे तत्काल रोककर चालान या थाने तक की कार्रवाई कर दी जाती है, लेकिन इस वाहन के मामले में नियमों की अनदेखी आखिर क्यों की जा रही है? यह सवाल लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
नशामुक्ति के पोस्टर और रैलियों के बीच यदि शराब की आपूर्ति गांव-गांव तक पहुंचाने वाले वाहनों पर कार्रवाई नहीं होती, तो अभियान की मंशा पर भी प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि नियम सिर्फ आम जनता के लिए हैं या फिर प्रभावशाली कारोबार से जुड़े वाहनों के लिए अलग व्यवस्था लागू है।

जनता पूछ रही है
पीछे नंबर प्लेट नहीं होने के बावजूद वाहन सड़कों पर कैसे दौड़ रहा है?अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हैं या फिर यह बुलेरो यूं ही “शराब एक्सप्रेस” बनकर गांव-गांव दौड़ती रहेगी।
इनका कहना हे
– आपके द्वारा दी गई जानकारी पर कार्यवाही की जा रही है इसमें समय लगेगा ।
आबकारी निरीक्षक वृत बरेली सुनील कुमार मीणा