बरेली रायसेन से यशवन्त सराठे की रिपोर्ट
-जल संरक्षण के लिये सरकार दुनिया भर के कायदे कानून वना ले पर जिन हाथो मे नदीयो की पवित्रता,ओर सुरक्षा, संरक्षण की जबाबदारी सौपी गयी हो यदि वो ही आंख वन्द करके नदियो का दोहन देख रहे हो किसी धृतराष्ट् से कम नही।
गंगा,नर्मदा तो पूजनीय है जब उनको नही वक्शा तो घोघरा ओर वारना की क्या विसात,जी हा बरेली नगर को जिन नदियो ने जीवनदान दिया हो जो नदी कभी स्वतन्त्रता से कल कल छल छल फैलकर वहती थी आज उसका अस्तित्व नाले मे परिवर्तित हो चुका है,जी हां वारना नदी का अस्तित्व ही समाप्त हो रहा हे वारना नदी के दोनो ओर 200मीटर रेतीले मैदान आज अतिक्रमित है,अतिक्रमण कर लोग खेती कर आय का जरिया वना लिया है प्रशासन के सभी आला अधिकारी एवं जनप्रतिनिधियो की आंख जानवूझ कर वन्द क्यो हो जाती है क्या इन सबकी मिलीभगत से ही ये गोरखधन्धा चल रहा है।हल्का पटवारी भी इसमे शामिल नजर आते है,
अतिक्रमण तो हो ही रहा है साथ ही नदी का पानी पम्प से खीचा जा रहा है,बजरी का अवैध खनन भी बैखोफ किया जा रहा है आखिर नदियो के किनारो पर हजारो एकड़ पर अवैध कब्जे हटेगे या नही।
आखिरकार कब खुलेगी धृतराष्टो की आंखे।