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गणेश प्रतिमाओ को अंतिम रूप दे रहे कलाकार

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सतीश मैथिल सांचेत रायसेन

छोटे छोटे गणेश जी की प्रतिमा को अंतिम रूप दे रहे कृष्णा मैथिल ने वताया की गणेश चतुर्थी पर वास्तु अनुसार ही घर लाएं भगवान गणेश की मूर्ति, हमेशा रहेगी सुख-समृद्धि। मान्यता है भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर चंद्रमा के दर्शन नहीं करना चाहिए। इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने पर कलंक का भागी बना पड़ता है। कृष्णा मैथिल द्वारा 100 से भी अधिक छोटे छोटे गणेश जी की प्रतिमा बनाई गई हैं और जो कि हर बच्चों को अपनी तरफ से निशुल्क प्रदान करेंगे कृष्ण मैथिल ने बताया कि 31 अगस्त से गणेशोत्सव का पर्व आरंभ होने वाला है। भाद्रपद माह के शु्क्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर गणेश उत्सव शुरू हो जाएगा और शुभ योग व मुहूर्त में घर-घर गणपति विराजेंगे। अनंत चतुर्दशी तिथि पर गणेश विसर्जन के साथ गणेशोत्सव का समापन होगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश प्रथम पूजनीय देवता माने गए हैं। भगवान श्रीगणेश विघ्न विनाशक और मंगलकारी देवता हैं। जहां श्रीगणेश का नित पूजन-अर्चन होता है वहां रिद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ का वास होता है। भवन के वास्तुदोष निवारण एवं सुख-शांति के लिए देवताओं में प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश को महत्वपूर्ण स्थान प्रदान किया गया है।

सुख-समृद्धि देंगे ये गणेश
सर्वमंगल की कामना करने वालों के लिए सिंदूरी रंग के गणपति की आराधना अनुकूल रहती है। सुख,शांति,समृद्धि की चाह रखने वालों को सफेद रंग के विनायक की मूर्ति लाना चाहिए। साथ ही,घर में इनका एक स्थाई चित्र भी लगाना चाहिए। घर में पूजा के लिए गणेश जी की शयन या बैठी मुद्रा हो तो अधिक शुभ होती है। यदि कला या अन्य शिक्षा के प्रयोजन से पूजन करना हो तो नृत्य गणेश की प्रतिमा या तस्वीर का पूजन लाभकारी है
बायीं सूंड वाले गणेश
घर में बैठे हुए और बायीं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेश जी विराजित करना चाहिए। दाएं हाथ की ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी हठी होते हैं और उनकी साधना-आराधना कठिन होती है। वे देर से भक्तों पर प्रसन्न होते हैं। इन्हें मंदिर में स्थापित किया जाता है।

काम में लगेगा मन
कार्यस्थल पर गणेश जी की मूर्ति विराजित कर रहे हों तो खड़े हुए गणेश जी की मूर्ति लगाएं। इससे कार्यस्थल पर स्फूर्ति और काम करने की उमंग हमेशा बनी रहती है। ध्यान रहे कि खड़े हुए श्रीगणेश जी के दोनों पैर जमीन को स्पर्श करते हुए हों,इससे कार्य में स्थिरता आती है। कार्यक्षेत्र पर किसी भी भाग में वक्रतुण्ड की प्रतिमा या चित्र लगाए जा सकते हैं,लेकिन यह ध्यान जरूर रखना चाहिए कि किसी भी स्थिति में इनका मुंह दक्षिण दिशा या नैऋय कोण में नहीं होना चाहिए।

वास्तुदोष निवारण के लिए
यदि घर के मुख्य द्वार पर एकदंत की प्रतिमा या चित्र लगाया गया हो तो उसके दूसरी तरफ ठीक उसी जगह पर दोनों गणेशजी की पीठ मिली रहे इस प्रकार से दूसरी प्रतिमा या चित्र लगाने से वास्तु दोषों का शमन होता है।

द्वारवेध दोष होगा दूर
यदि भवन में द्वारवेध हो यानि दरवाजे से जुड़ा किसी भी तरह का वास्तुदोष हो(भवन के द्वार के सामने वृक्ष, मंदिर, स्तंभ,सड़क आदि के होने पर द्वारवेध माना जाता है)। ऐसे में घर के मुख्य द्वार पर गणेश जी की बैठी हुई प्रतिमा लगानी चाहिए लेकिन उसका आकार 11 अंगुल से अधिक नहीं होना चाहिए।

अशुभ ग्रहों की शांति के लिए-
स्वस्तिक को गणेश जी का रूप माना जाता है। वास्तुशास्त्र भी दोष निवारण के लिए स्वास्तिक को उपयोगी मानता है। स्वास्तिक वास्तु दोष दूर करने का महामंत्र है एवं यह ग्रह शान्ति में लाभदायक है।भवन के जिस भाग में वास्तु दोष हो उस स्थान पर घी मिश्रित सिंदूर से दीवार पर स्वास्तिक बनाने से वास्तु दोष का प्रभाव कम होता है।

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