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दूसरे दिन भी मना रक्षाबंधन, जगह-जगह कजलियों की निकाली गई शोभायात्रा,गाए सावन के मनभावन गीत 

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 एक दूसरे से भुजरिया लेकर गले मिले लोग, गलतियों के लिए क्षमा मांगी 

सी एल गौर रायसेन

पवित्र रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार दूसरे दिन शनिवार को जिला मुख्यालय रायसेन सहित जिले भर के शहरी क्षेत्र से लेकर गांव गांव में मनाया गया । इस मौके पर कजलियों की शोभायात्राएं सावन के मनभावन गीतों के साथ धूमधाम से निकाली गई। इस अवसर पर जगह-जगह लहंगी खेल कर लोगों ने सावन के मनभावन गीत गाकर दर्शकों का मन मोह लिया वहीं दूसरी ओर कजलियां की विशेष पूजा अर्चना कर माता बहनों ने एकत्रित होकर सावन के मनभावन गीतों को गाकर दर्शकों को आश्चर्यचकित कर दिया।

 कजलियों को सम्मानपूर्वक विसर्जन

काजलिया पर्व के अवसर पर एक दूसरे ने भुजरिया आपस में लेकर गलतियों के लिए क्षमा प्रार्थना की छोटों ने बड़ों से भुजरिया लेकर आशीर्वाद प्राप्त किया वहीं इसके बदले में बड़ों ने अपने छोटों के लिए भुजरिया मिलकर आशीर्वाद दिया। इस मौके पर देखने में आ रहा था कि श्रद्धा भावना की एक सुंदर झलक से पूरा माहौल सावन के गीतों में रंगा हुआ दिखाई दिया, बच्चे पुरूष महिलाएं सभी सावन के मनभावन गीतों का आनंद ले रहे थे।

रायसेन नगर के पाटन देव क्षेत्र में भुजरिया पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया बड़ी संख्या में  एकत्रित होकर सावन के गीत गाते हुए कजलिया शोभा यात्रा में उत्साह के साथ शामिल हुए वहीं सावन के मनभावन गीत गाकर लहंगी नृत्य के माध्यम से भुजरिया पर्व की खुशियां मनाई गई। ढोल, नगाड़े, ढप्ली, टिमकी की मधुर तान के साथ लोग सावन के गीत गाकर झूमते हुए दिखाई दे रहे थे। बरसों पुरानी कजलिया शोभा यात्रा और लहंगी नृत्य की यह परंपरा आज के इस आधुनिक दौर में भी जारी है बड़ी बात है जहां आधुनिक दौर में युवा पीढ़ी मोबाइल के माध्यम से रील और अन्य मनोरंजन के कार्यक्रम देख रहे हैं वहीं पुरानी भुजरिया पर्व की परंपरा शहरी क्षेत्र से लेकर गांव-गांव में आज भी हमें सनातन की पुरानी परंपरा की ताजा याद दिला रही है, वास्तव में पुरानी सनातन परंपरा जो कि हमें भारतीय संस्कृति की ताज याद दिलाती है।

नगर के नरापुरा, गोपालपुर, चोपड़ा मोहल्ला, पटेल नगर सहित विभिन्न गांव में भी काजलिया पर धूमधाम के साथ मनाया गया । कजलियो की शोभा यात्राएं उत्साह के साथ निकाली गई और प्राचीन मिश्र तालाब किनारे जाकर कजलियो को सम्मान के साथ पूजन अर्चना कर विसर्जित किया गया । इसके पश्चात एक दूसरे से भुजरिया लेकर रक्षाबंधन और भुजरिया दोनों पर्वों की शुभकामनाएं दी गई, इसके साथ ही लोगों ने मंदिरों पर पहुंचकर भगवान के लिए भुजरिया अर्पित कर सुख समृद्धि का आशीर्वाद मांगने के साथ सुख शांति समृद्धि के लिए भगवान के मंदिरों में प्रार्थना की गई।

वास्तव में सावन का भुजरिया पर्व एक ऐसा त्यौहार है जिस पर सावन के मनभावन गीत सुनकर लहंगी नृत्य को देखकर स्वयं ही मन पिरफुल्लित हो उठता है और सावन के गीत सुनकर हर आदमी थिरकने के लिए मजबूर हो जाता है। इस प्रकार से पूरे जिले भर में कजलिया पर्व धूमधाम के साथ उत्साह पूर्वक मनाया गया, इसके साथ ही रक्षाबंधन के दूसरे दिन शनिवार को जो बहने शुक्रवार को किशी कारण से अपने भाइयों को राखी नहीं बांध पाई थी ऐसी अनेकों बहनों ने भुजरिया पर्व के अवसर पर अपने भाइयों को रक्षा सूत्र बांधे इस प्रकार से भुजरिया पर्व के दिन भी दिन भर लोगों की चहल-पहल नगर गांव में दिखाई दी।

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