सागर। देश की स्वतंत्रता केवल सीमा पर तैनात सैनिकों की सुरक्षा का परिणाम नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम में प्राणों का बलिदान देने वाले असंख्य वीर सपूतों के त्याग और समर्पण की भी देन है। जिस प्रकार आज सैनिक सीमा पर देश की रक्षा कर रहे हैं, उसी प्रकार स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वीर सेनानियों ने पराधीनता की बेड़ियों से भारत को मुक्त कराने के लिए संघर्ष किया और अनेक ने अपने प्राण न्योछावर किए।
स्वतंत्रता के बाद संविधान निर्माण में भी अनेक महापुरुषों का योगदान रहा। संविधान सभा में जैन समाज के 6 प्रतिनिधि शामिल थे। सागर के जैन समाज के योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने रतनचंद मालवीय का नाम लिया, जो संविधान निर्माण की प्रक्रिया में सहभागी रहे और सागर में जन्मे श्री मालवीय जैन परिवार से संबंधित थे। स्वतंत्रता के बाद हुए प्रथम चुनावों के समय सागर के प्रथम नागरिक धर्मचंद सोधिया जैसे व्यक्तित्वों ने भी राष्ट्र और समाज के प्रति योगदान दिया।
मुनिश्री ने कहा कि जैन समाज की भूमिका केवल धर्म तक सीमित नहीं रही, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम से लेकर संविधान निर्माण तक समाज ने राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया। हमें अपने गौरवशाली इतिहास को स्मरण रखते हुए राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए।
उन्होंने आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के संदेश “धर्मो रक्षति रक्षितः” का उल्लेख करते हुए कहा कि जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। इसी प्रकार हम देश की रक्षा करेंगे तो देश भी हमारी सुरक्षा करेगा। उन्होंने सभी के लिए स्वतंत्रता, शांति और सुरक्षा की मंगलकामना की।
भाग्योदय तीर्थ में हुआ ध्वजारोहण
सागर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भाग्योदय तीर्थ, सागर में निर्यापक मुनि श्री अभय सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में ध्वजारोहण कार्यक्रम संपन्न हुआ। भाग्योदय तीर्थ के ट्रस्टी एवं जैन पंचायत सभा के अध्यक्ष मुकेश जैन ढाना ने ध्वजारोहण किया। इस अवसर पर राष्ट्रगीत एवं वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया गया।
कार्यक्रम में महेश बिलहरा, सुगम कोठारी, प्रशासक ए.के.जैन,देवेंद्र जैना,राजेश जैन, प्रियेश जैन सीए, प्रकाश जैन, अनिल नैनधरा,चक्रेश पटना, दिनेश दिगंबर, सुदीप जैन सीए,रितेश जैन, नीरज जैन,विशाल जैन,रानू केसली सहित भाग्योदय तीर्थ के ट्रस्टी, चिकित्सक, अधिकारी-कर्मचारी एवं कॉलेज के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने राष्ट्र की एकता, अखंडता और प्रगति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।