शरद शर्मा बेगमगंज रायसेन
बेगमगंज थाना क्षेत्र के ग्राम भुरेरू में पंचायत में हुए विवाद के बाद देर रात दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट हो गई। विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों की ओर से लाठी-डंडे और धारदार हथियार चलने लगे। अचानक हुए इस खूनी संघर्ष में करीब 8 लोग घायल हो गए, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, गांव में पंचायत के दौरान शिकायतों को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद मामले में एफआईआर भी दर्ज हुई। बताया जा रहा है कि इसके बाद कुछ लोग शाम के समय बेगमगंज पहुंचे और शैतान साहू की दुकान पर विवाद हो गया। इसी विवाद के बाद रात करीब 10 बजे ग्राम भुरेरू में दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए, जहां जमकर मारपीट हुई।

अचानक चले हथियार, गांव में मची दहशत
प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार विवाद के दौरान लाठी-डंडों के साथ धारदार हथियारों का भी इस्तेमाल किया गया। हमले में कई लोगों को चोटें आईं। किसी के हाथ में चोट तो किसी के पैर में चोट आने की बात सामने आई है, जबकि कुछ लोगों के सिर में भी चोट लगी है। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल बन गया।
घटना की सूचना मिलते ही बेगमगंज पुलिस मौके पर पहुंची और सभी घायलों को उपचार के लिए सिविल अस्पताल भेजा गया। गंभीर घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है।

पुलिस बल तैनात, अधिकारियों ने संभाला मोर्चा
घटना की गंभीरता को देखते हुए गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है। एसडीओपी सोनाली गुप्ता और थाना प्रभारी सहित पुलिस स्टाफ सिविल अस्पताल पहुंचा और घायलों से घटना की जानकारी ली। पुलिस ने दोनों पक्षों के बयान लेकर मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है।
बताए गए घायलों में सौरभ साहू, सुमित साहू, चेतराम साहू, लक्की साहू, भूपेंद्र साहू, राजू साहू और रविशंकर साहू के नाम सामने आए हैं। घायलों की संख्या और उनकी स्थिति की पुलिस या अस्पताल स्तर से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
सवाल: विवाद का समाधान हथियारों से क्यों?
भुरेरू की घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि आपसी विवादों का समाधान आखिर हिंसा के रास्ते से क्यों तलाशा जा रहा है। शिकायतें और मतभेद किसी भी समाज का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन उनका समाधान बातचीत और कानून के रास्ते से होना चाहिए।
टेबल पर बैठकर बातचीत से जिस विवाद का समाधान हो सकता है, उसके लिए लाठी-डंडे और धारदार हथियार उठाना किसी भी लिहाज से समझदारी नहीं है। एक छोटे से विवाद ने कई परिवारों को अस्पताल पहुंचा दिया। किसी के हाथ-पैर में चोट आई तो किसी के सिर पर गंभीर चोट लगी।
कानून अपने हाथ में लेने के बजाय दोनों पक्षों को बातचीत, पंचायत और कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेना चाहिए, ताकि विवाद का अंत हिंसा नहीं बल्कि समाधान के साथ हो।