आज 21 जून को दीवानगंज कर्क रेखा पर दिखेगा अनोखा नजारा, दोपहर 12 बजे गायब होगी परछाई, सैलानियों की उमड़ेगी भीड़
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
21 जून यानी आज ग्रीष्म अयनांत (Summer Solstice) के अवसर पर भोपाल-विदिशा हाईवे-18 स्थित कर्क रेखा क्षेत्र में बड़ी संख्या में सैलानियों और प्रकृति प्रेमियों के पहुंचने की संभावना है। वर्ष में एक बार आने वाला यह विशेष खगोलीय क्षण लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता है, जब सूर्य कर्क रेखा के ठीक ऊपर पहुंचता है और दोपहर के समय खड़े व्यक्ति या वस्तु की परछाई लगभग गायब होती दिखाई देती है।
हर साल की तरह इस बार भी क्षेत्रीय नागरिक, विद्यार्थी, फोटोग्राफर और पर्यटक इस दुर्लभ दृश्य को अपने कैमरे में कैद करने के लिए कर्क रेखा पहुंचेंगे। दोपहर करीब 12 बजे से 12:30 बजे के बीच लोग अपनी परछाई को देखने और उसकी तस्वीरें लेने के लिए उत्सुक रहेंगे। कई लोग इस वैज्ञानिक घटना को प्रत्यक्ष देखने के लिए परिवार सहित पहुंचते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार 21 जून उत्तरी गोलार्ध का सबसे बड़ा दिन होता है। इस दिन सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर लगभग सीधी पड़ती हैं, जिससे खड़ी वस्तुओं की छाया बेहद छोटी हो जाती है और कुछ समय के लिए लगभग दिखाई नहीं देती। यही कारण है कि यह दिन खगोल विज्ञान और भूगोल के विद्यार्थियों के लिए भी विशेष महत्व रखता है।
कर्क रेखा स्थल पर स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक इंतजाम किए जा सकते हैं, क्योंकि दोपहर के समय हाईवे किनारे लोगों की भीड़ बढ़ने की संभावना रहती है। पिछले वर्षों में भी यहां बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर इस अद्भुत प्राकृतिक घटना का अवलोकन किया था।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि कर्क रेखा पर बनने वाला यह दृश्य न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा देता है। आज एक बार फिर कर्क रेखा पर विज्ञान और प्रकृति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा, जहां हर कोई अपनी गायब होती परछाई को कैमरे में कैद करने की कोशिश करता नजर आएगा।
21 जून को गायब हो जाती है परछाई
कर्क रेखा स्थल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि 21 जून को दोपहर लगभग 12 बजे सूर्य की किरणें 90 डिग्री के कोण पर लंबवत पड़ती हैं, जिसके कारण यहां खड़े व्यक्ति की परछाई लगभग दिखाई नहीं देती। इसी वजह से इस क्षेत्र को “नो शैडो जोन” भी कहा जाता है।
हर साल इस दुर्लभ खगोलीय घटना को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। भूगोल की किताबों और ग्लोब पर देखी जाने वाली कर्क रेखा के वास्तविक स्थल पर खड़े होने का अनुभव पर्यटकों के लिए बेहद खास होता है।