सुरेंद्र जैन धरसीवां रायपुर
तेज हवा के झोंके के साथ उद्योगों की काली धूल डस्ट घर घर हर घर तक पहुंच रही ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है बाबजूद इसके पर्यावरण संरक्षण मंडल की आंखों पर मानो पट्टी बंधी हो अब बड़ा सवाल ये उठता है कि पर्यावरण संरक्षण मंडल क्या प्रदूषण संरक्षण मंडल में तब्दील हो चुका है.हमेशा के तरह शुक्रवार को भी शाम चार बजे अचानक तेज हवा चली ओर वायु मंडल में चारों तरफ उद्योगों की काली धूल डस्ट फैल गई जो सांकरा सोंडरा सिलतरा निमोरा आदि आसपास के दर्जनों गांवों में घर घर हर घर के अंदर तक पहुंच गई ग्रामीणों का सांस लेना मुश्किल हो गया.सांकरा की गृहिणी कामिनी टंडन कहती है हवा चलती है और फैक्ट्रियों की काली राख किचन तक पहुंच जाती है झाड़ू लगा लगाकर परेशान हैं कितनी बार झाड़ू लगाएं.वही कपड़े सिलकर अपना परिवार चलाने वाली ज्ञानेश्वरी साहू कहती हैं औद्योगिक प्रदूषण से बहुत परेशानी है पूरी दुकान में काली डस्ट भर जाती है.जानकी साहू कहती है दुकान घर सब जगह हवा चलते ही फैक्ट्रियों की धूल डस्ट भरने से परेशानी होती है जैसे ही हवा चलती है हवा में उद्योगों की काली धूल डस्ट आने से दुकान का शटर बंद करते हैं घर के दरवाजे भी बंद करते हैं फिर भी अंदर पूरा काला काला हो जाता है.यहां यह बताना लाजमी होगा कि हम समय समय पर औद्योगिक प्रदूषण का मुद्दा जनहित में उठाता रहा है ग्रामीणों की सुनने वाला कोई नहीं कई बार शिकायतों के बाबजूद न तो जनप्रतिनिधि कोई ध्यान देते न अधिकारी यही कारण है कि प्रदूषण दिनों दिन बढ़ता जा रहा है