बड़ा सवाल: राजाओं के तालाब सदियों से अडिग, तो सरकारी तालाब 5 साल में ही क्यों दम तोड़ रहे?
रायसेन। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत शनिवार को रायसेन के ऐतिहासिक पुरन तालाब पर श्रमदान कार्यक्रम का आयोजन किया गया, लेकिन यह आयोजन केवल औपचारिक श्रमदान तक सीमित नहीं रहा। जिले के प्रभारी मंत्री नारायण सिंह पवार ने अपने संबोधन में विभागीय कार्यप्रणाली और वर्तमान निर्माणों की गुणवत्ता पर ऐसे तीखे प्रहार किए कि वहां मौजूद अधिकारियों के पसीने छूट गए। प्रभारी मंत्री ने मंच से दो-टूक शब्दों में कहा कि जल संरक्षण के ऐसे अभियान केवल रस्मअदायगी या फोटो खिंचवाने का माध्यम नहीं बनने चाहिए। उन्होंने साफ किया कि जब तक शासन और प्रशासन के साथ-साथ आम नागरिक पूरी ईमानदारी से इस मुहिम से नहीं जुड़ेंगे, तब तक जल स्रोतों का वास्तविक संरक्षण संभव नहीं है।

वर्तमान इंजीनियरिंग और भ्रष्टाचार पर तंज कसते हुए मंत्री पवार ने एक कड़वी सच्चाई स्वीकार की कि राजा-महाराजाओं के जमाने के तालाब सदियों बाद भी आज पूरी मजबूती के साथ पानी सहेजे हुए हैं, जबकि आज के दौर में करोड़ों की लागत से बनने वाले सरकारी तालाब 5 से 10 साल भी नहीं टिक पा रहे हैं। मंत्री का यह बयान सीधे तौर पर जल संसाधन विभाग और ठेकेदारों के गठजोड़ पर बड़ा हमला माना जा रहा है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि निर्माण कार्यों के स्तर में भारी गिरावट आई है, जिसे सुधारने के लिए सरकार जल्द ही कड़े कदम उठाने जा रही है।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर सांची विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी, भोजपुर विधायक सुरेंद्र पटवा, पूर्व मंत्री रामपाल सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश शर्मा और नगरपालिका अध्यक्ष सविता जमुना सेन सहित कई दिग्गज नेता और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अब क्षेत्र में चर्चा इस बात की है कि प्रभारी मंत्री द्वारा सिस्टम को दी गई यह ‘कड़वी दवा’ आने वाले समय में जमीनी स्तर पर क्या बदलाव लेकर आती है।