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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा गैरतगंज का स्टेडियम: दूसरे चरण के निर्माण में भी अमानक सामग्री का बोलबाला

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करोड़ों की लागत, फिर भी बदहाली; मॉनिटरिंग के अभाव में खेल विभाग और निर्माण एजेंसी की मिलीभगत से हो रहा घटिया निर्माण
सैयद मसूद अली पटेल गैरतगंज  रायसेन

जिले के गैरतगंज नगर के वार्ड क्रमांक 12 गैरतपुर क्षेत्र में निर्माणाधीन खेल स्टेडियम पिछले तीन वर्षों से भ्रष्टाचार और लापरवाही का केंद्र बना हुआ है। कछुआ चाल से चल रहे इस निर्माण कार्य के दूसरे चरण में अब खुलेआम अमानक स्तर की निर्माण सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। आलम यह है कि मॉनिटरिंग के लिए जिम्मेदार अधिकारी मौके से नदारद हैं और निर्माण एजेंसी बेखौफ होकर घटिया बाउंड्रीवॉल खड़ी कर रही है।

पहले चरण की कहानी: 1.63 करोड़ स्वाहा, निर्माण अधूरा
​स्टेडियम का पहला चरण पुलिस हाउसिंग बोर्ड की एजेंसी ‘मेसर्स आरसी अग्रवाल’ द्वारा 1 करोड़ 63 लाख की लागत से किया गया था। आरोप है कि एजेंसी ने भारी भ्रष्टाचार करते हुए निर्माण को अधूरा छोड़ दिया। पहले चरण में बनाई गई संरचनाएं कुछ ही महीनों में जर्जर हो गईं। बाउंड्रीवॉल का बड़ा हिस्सा बनाया ही नहीं गया, जिसके कारण एक साल तक काम बंद पड़ा रहा।

दूसरे चरण में भी वही हाल: 70 लाख का बजट, गुणवत्ता शून्य

​विभाग ने अब दूसरे चरण के अधूरे कार्यों को करीब 70 लाख रुपये की लागत से नई एजेंसी के माध्यम से शुरू कराया है। लेकिन, इतिहास खुद को दोहरा रहा है। वर्तमान में चल रहे बाउंड्रीवॉल के निर्माण में बेहद घटिया अमानक स्तर के लोहे और सीमेंट का उपयोग किया जा रहा है। बिना किसी तकनीकी मापदंड के आनन-फानन में दीवारें खड़ी की जा रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि तहसील स्तरीय खेल विभाग के अधिकारियों के संरक्षण में यह भ्रष्टाचार फल-फूल रहा है। मॉनिटरिंग के नाम पर स्थिति शून्य है।
मैदान की वर्तमान स्थिति: ‘बद से बदतर
​पहले चरण के काम की पोल आज मौके पर साफ देखी जा सकती है। स्टेडियम की हालत वर्तमान में बद से बदतर है मैदान के चारों ओर लगाए गए पेवर ब्लॉक और पत्थर उखड़कर बिखरने लगे हैं। खिलाड़ियों के लिए बनाया गया रनिंग एरिया मामूली ठोकर से भरभराकर गिर रहा है। स्टेडियम का मुख्य भवन लोकार्पण से पहले ही जर्जर अवस्था में पहुँच चुका है। निर्माण सिर्फ दिखावे की रंगाई-पुताई तक सिमट कर रह गया है।
जांच की मांग
​नगरवासियों और खेल प्रेमियों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। करोड़ों रुपये के सरकारी बजट का दुरुपयोग करने वाली एजेंसियों और मौन सहमति देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठ रही है। यदि समय रहते गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ, तो यह स्टेडियम खिलाड़ियों के काम आने के बजाय केवल एक ‘जर्जर खंडहर’ बनकर रह जाएगा।

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