विनोद आर्य सागर
मुंबई फ़िल्म जगत की बहुप्रतीक्षित प्रेम कहानी गुस्ताख़ इश्क़ में इस बार बुंदेलखंड के साहित्यिक हस्ताक्षर, प्रसिद्ध गज़लकार अशोक मिज़ाज़ की शायरी का जादू दर्शकों पर चलेगा। मिज़ाज़ साहब के लिखे कई शेर फ़िल्म के डायलॉग्स के बीच पिरोए गए हैं, जिन्हें महान अभिनेता नसीरुद्दीन शाह अपनी आवाज़ देंगे। यह बुंदेलखंड के साहित्यिक जगत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। प्रसिद्ध फैशन डिज़ाइनर मनीष मल्होत्रा द्वारा निर्मित और फिल्म हवाईज़ादा फेम विभु पुरी द्वारा निर्देशित यह फिल्म 28 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज़ हो रही है। फिल्म में विजय वर्मा, फातिमा सना शेख, नसीरुद्दीन शाह और शारिब हाशमी मुख्य भूमिकाओं में हैं।

फिल्म में नसीरुद्दीन शाह एक उस्ताद शायर की भूमिका निभा रहे हैं। हाल ही में रिलीज़ हुए ट्रेलर में मिज़ाज़ साहब के दो शेर सुनाई दे रहें, जिसमें नसीरुद्दीन शाह की आवाज़ में, $गम कोई देना है तो दे दे मुझे, दिल में रख लूंगा निशानी की तरह…. तो विजय वर्मा की आवाज़ में मेरा लहजा कैक्टस सा खुरदुरा, तेरी बातें रातरानी की तरह…. सुनाई दे रहा है।
विशाल से पुराना नाता है, आपस में गुरु भाई के संबंध
इस फ़िल्म में मिज़ाज़, मशहूर संगीतकार विशाल भारद्वाज और गीतकार गुलझार के साथ हैं। उन्होंने बताया कि विशाल भारद्वाज के साथ यह उनका दूसरा प्रोजेक्ट है। इससे पहले, उन्होंने 2020-21 में रिलीज़ हुई। फिल्म सोन चिरैया के लिए गीत नैना ने मार गोरी… भर के चाहे दुनाली मार दे री क्रिएट किया था। मिज़ाज़ ने बताया कि विशाल भारद्वाज से परिचय लगभग 20-25 साल पुराना है। एक ज़माने में मैं और विशाल भारद्वाज दोनों मशहूर शायर बशीर बद्र साहब की शागिर्दी में थे, इस नाते विशाल भारद्वाज मेरे गुरु भाई हैं। पिछले कुछ सालों से बशीर बद्र जी की

तबीयत नासाज़ होनेके बाद वो मुझसे इस्लाह लेते हैं। मिज़ाज़, जो हिंदी-उर्दू गज़लकारों के एक बड़े हस्ताक्षर माने जाते हैं। उनकी 12 ग़ज़ल संग्रह ख्यात वाणी प्रकाशन और ज्ञानपीठ जैसे प्रकाशन से किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनको हिंदी और उर्दू ग़ज़ल पा अब तक विभिन्न राज्यों से कई बड़े पुरुस्कार मिल चुके हैं जिनमे ताज भोपाली पुरुस्कार ,निश्तर खानकाही अवार्ड, नई गजल पुरुस्कार आदि शामिल हैं। इनकी ग़ज़सलों पर पांच विश्वविद्यालयों में पीएचडी हुई है जिनमे केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू, मौलाना आजाद केंद्रीय उर्दू विश्वविद्यालय हैदराबाद, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन,औरंगाबाद यूनिवर्सिटी और विहार यूनिवर्सिटी शामिल हैं।चार इंडोपाक मुशायरों के अलावा देश भर में अखिल भारतीय मुशायरों और कविसम्मेलनों में वोयह $िफल्मी उपलब्धि उनकी रचनात्मक यात्रा में एक नया आयाम जोड़ती है।