रामभरोस विश्वकर्मा, मंडीदीप रायसेन
भोपाल नटराज कॉलोनी (11 मिल), मिसरोद स्थित श्री 1008 आदिश्वर दिगंबर जिनालय में चल रहे दशलक्षण महापर्व का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के रंगों से सराबोर रहा। सांगानेर (जयपुर) से पधारे विद्वान पंडित अर्चित जैन शास्त्री के कुशल निर्देशन में धूप दशमी के अवसर पर विशेष अभिषेक, पूजा-अर्चना और शांति धारा संपन्न हुईं।
सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी। बड़ी संख्या में परिवारों ने इस पावन पर्व में भाग लेकर धर्मलाभ अर्जित किया। वातावरण भक्ति गीतों और जयकारों से गुंजायमान रहा।
धूप दशमी पर लिया पापों के त्याग का संकल्प
दसलक्षण पर्व के छठे दिन सुगंध दशमी पर भक्तों ने सामूहिक रूप से पापों का परित्याग और सद्गुणों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
*पुण्यार्जकों को मिला शांतिधारा का सौभाग्य*
– प्रथम शांति धारा का पुण्य लाभ विनोद जैन (RNG) को प्राप्त हुआ।
– द्वितीय शांति धारा बृजेश कुमार जैन के द्वारा संपन्न की गई।
– तृतीय शांति धारा का सौभाग्य मनीष जैन को प्राप्त हुआ।
– चतुर्थ शांति धारा का पुण्य लाभ रजनीश जैन को मिला।
*दशलक्षण पर्व का महत्व* :
दिगंबर जैन धर्म का यह दस दिवसीय पर्व आत्मा की शुद्धि और मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होने का संदेश देता है। प्रत्येक दिन को क्रमशः उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य जैसे गुणों के लिए समर्पित किया जाता है।