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सड़क का सपना अब भी अधूरा: जमुनिया और खमरिया की जंग कीचड़ से

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बरसात में चलना पड़ता है कच्चे और ऊबड़-खाबड़ रास्ते से

धीरज जॉनसन, दमोह

दमोह:जिले के जबेरा क्षेत्र के सुदूर पहाड़ी इलाकों में बसे ग्राम जमुनिया और खमरिया आज भी पक्की सड़क के इंतजार में हैं। जमुनिया तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को करीब 3 किलोमीटर ऊबड़-खाबड़ और कच्चे रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है, जो बरसात के दिनों में कीचड़ और फिसलन का जाल बन जाता है। वहीं खमरिया गांव तक पहुंचने के लिए भी 2 किलोमीटर कच्चा रास्ता ही सहारा है।

आदिवासी बहुल इलाका, सुविधाओं से वंचित

सिग्रामपुर से भैसा पहाड़ी के आगे ग्राम पंचायत चौरई के अंतर्गत आने वाले ये गांव आदिवासी बहुल हैं। यहां के लोग पहले से ही सीमित संसाधनों और कठिन जीवनशैली के बीच अपना गुजारा करते हैं। सड़क न होने से इनकी परेशानियां कई गुना बढ़ जाती हैं।

बरसात में हालात और बिगड़ते हैं इन दिनों यहां हालात इतने गंभीर हो जाते हैं कि मरीज़ों को अस्पताल तक पहुंचाना, बच्चों का स्कूल जाना, या फिर आवश्यक सामान गांव तक लाना,सब कुछ मानो एक जंग जीतने जैसा हो जाता है। कई बार बीमार महिलाओं और गंभीर रोगियों को मुख्य सड़क तक लाना कठिन हो जाता है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना था कि नेताओं के वादों में सड़कें हमेशा बनी रहती हैं, लेकिन हकीकत में तस्वीर नहीं बदलती। कभी विकास योजनाओं में शामिल हो जाते हैं, तो कभी अचानक गायब हो जाते हैं। आश्चर्यजनक बात यह है कि संबंधित लोग इस स्थिति से पूरी तरह वाकिफ होने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाते या फिर अनदेखी करते हैं। ग्रामीण चाहते है कि जल्द से जल्द पक्की सड़क निर्माण हो ताकि जीवन सुगम हो सके।

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