-पैदल चलते हुए पहुंचे दीवानगंज
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर ओमप्रकाश सोलंकी अपनी अटूट इच्छाशक्ति और संकल्प के साथ 6 फरवरी से एक ऐतिहासिक संकल्प यात्रा पर निकले हैं।कई रोगो से ग्रसित श्री सोलंकी की यह यात्रा धार जिले के मनावर तहसील के ग्राम झिरवी से शुरू होकर सतना जिले के मैहर स्थित माँ शारदा मंदिर तक जाएगी, जिसे आला-उदल मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। अभी तक सोलंकी ने 380 किमी की पूरी कर ली। अब 400 किमी का सफर शेष रह गया है।
ओमप्रकाश सोलंकी की यह पदयात्रा अब तक झिरवी से इंदौर, आष्टा, भोपाल होते हुए साँची तक लगभग 380 किमी पूरी हो चुकी है। आने वाले दिनों में उनकी यात्रा विदिशा, सागर, दमोह से होते हुए मैहर तक जाएगी, जिसके लिए उन्हें लगभग 25 और दिन चलना होगा। कुल मिलाकर यह यात्रा 800 किमी से अधिक की दूरी तय करेगी।
ओमप्रकाश सोलंकी प्रतिदिन 22 से 25 किमी पैदल चलते हैं। जिसमें उन्होंने बताया कि सफर में कई कठिनाइयाँ आ रही हैं। बार-बार सड़क किनारे से गाड़ियों की आवाजाही के कारण उतरना-चढ़ना, रूट बदलना, और विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों से गुजरना इस यात्रा को और चुनौतीपूर्ण बना रहा है।
30,000 कदम रोजाना चलते हैं
ओमप्रकाश सोलंकी ने बताया कि उनके मोबाइल ऐप में रोजाना लगभग 30,000 कदम दर्ज हो रहे हैं। यह यात्रा न केवल एक धार्मिक संकल्प है बल्कि एक आत्मबल और सहनशक्ति की प्रेरणादायक मिसाल भी है।
गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद जारी है यात्रा
गौरतलब है कि ओमप्रकाश सोलंकी उच्च रक्तचाप और गंभीर घुटनों के ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित हैं। बावजूद इसके, वह अपनी यात्रा को अकेले और बिना किसी सहारे के पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
मैहर माँ शारदा देवी मंदिर का महत्व
मैहर देवी मंदिर मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित एक प्रसिद्ध शक्ति पीठ है। माना जाता है कि यहाँ माँ शारदा निवास करती हैं और वीर योद्धा आला-उदल आज भी उनकी पूजा करने आते हैं। यह 1063 सीढ़ियों वाले पहाड़ी मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है, जिसे भक्तगण महान श्रद्धा से नमन करने आते हैं।
संकल्प, श्रद्धा और अदम्य इच्छाशक्ति का उदाहरण
ओमप्रकाश जी की यह यात्रा श्रद्धा, सहनशक्ति और आत्मविश्वास का प्रतीक है। उनकी इस प्रेरणादायक पहल से समाज में यह संदेश जाता है कि अगर संकल्प दृढ़ हो तो कोई भी बाधा हमें अपने लक्ष्य तक पहुँचने से नहीं रोक सकती। यह यात्रा वास्तव में ‘संकल्प से सिद्धि की ओर’ बढ़ते हुए अटूट विश्वास की मिसाल है।