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-कमर्शियल के डिस्टीब्यूटरों की सप्लाई पर भी पड़ रहा विपरीत प्रभाव
सुरेंद्र जैन धरसीवां
घरेलू सिलेंडरों से व्यवसायिक सिलेंडरों में गैस ट्रांसफर करने वालों को भरपूर मात्रा में एक ग्रामीण वितरक एजेंसी द्वारा पहुंच सेवा का लाभ दिया जा रहा है जिसका सीधा सीधा प्रभाव कामर्शियल के डिस्टीब्यूटरों की सप्लाई पर पड़ रहा है क्योंकि घरेलू से व्यवसायिक बनाने वाले बहुत कम रेट में दुपहिया से पहुंचा पहुंचाकर कामर्शियल सिलेंडरों को बेचते हैं।
सूत्रों के मुताबिक करीब तीस किलो मीटर की दूरी से प्रतिदिन सुबह उक्त एजेंसी के घरेलू सिलेंडरों से भरी गाड़ी घरेलू से कामर्शियल में गैस ट्रांसफर करने वालों के यहां सप्लाई देने पहुंच जाती है और सप्लाई देकर इधर उधर टाइम पास करने निकल जाती है जैंसे ही सिलेंडर खाली होते हैं घरेलू से व्यवसायिक बनाने वाले दुकानदार काल करके पुनः बुला लेते हैं इस तरह सुबह से शाम तक यह क्रम चलता है
सूत्रों की माने तो ग्रामीण वितरक द्वारा हजार रुपए में घरेलू सिलेंडर की सफलाई करने से घरेलू से व्यवसायिक बनाने वाले 4घरेलू सिलेंडरों से 3नग19केजी के व्यवसायिक सिलेंडर बना लेते है अर्थात 4000रुपए में घरेलू गैस खरीदकर उसे कामर्शियल में ट्रांसफर कर लगभग 6000रुपए बना लेते हैं इस तरह दिनभर में इस अवैध कार्य को करने वाले एक एक दिन में दस पंद्रह हजार रुपए की कमाई कर लेते हैं
घरेलू सिलेंडरों की आपूर्ति करने वाली ग्रामीण वितरक एजेंसी उन्हें रविवार हो या दिवाली या कोई भी त्यौहार क्यों न हो हर दिन भरपूर संख्या में घरेलू सिलेंडर भरपूर मात्रा में दे रही हैं
उज्ज्वला के कार्डों पर हो रही आपूर्ति
सूत्रों की माने तो यह पूरा खेल उज्ज्वला के कनेक्शनधारियों के नाम पर हो रहा है औद्योगिक क्षेत्रों से लगे गांवों में अधिकांश गरीब तबका उद्योगों की डोलाचार की काली राखड़ को मिट्टी के साथ मिलाकर लड्डू बनाकर सुखाकर रखते हैं जिसे वह सिगड़ी में कोयले के रूप में जलाते हैं इस फोकट की इंधन का इस्तेमाल करने का कारण उन्हें गैस सिलेंडरों के महंगे खर्च से बचत होती है और अधिकांश उपभोक्ता कई माह तक रिफिल ही नहीं लेते इसी का लाभ घरेलू से कामर्शियल बनाने वाले ओर कुछ ग्रामीण वितरक एजेंसी उठा रही हैं उज्ज्वला के कनेक्शनधारियों के नाम पर रिफिल बताने से उन कनेक्शनधारियों को भी घर बैठे उनके खाते में सब्सिडी का लाभ मिलता रहता है इस तरह सरकार का तेल कंपनियों का दोनों तरफ घाटा होता है एक तरफ तो सब्सिडी गई दूसरी तरफ जो कामर्शियल बिकने से लाभ होता वो भी हाथ से गया क्योंकि घरेलू से ही कामर्शियल बनाकर बेंच देते हैं तो कामर्शियल डिस्टीब्यूटरों का कैसे बिकेगा।
5किलो मीटर पर एजेंसी फिर 30किलो मीटर दूरी से क्यों आ रही घरेलू गैस की गाड़ी
जिस कंपनी के घरेलू सिलेंडरों की गाड़ी प्रतिदिन सांकरा जेके वीडियो हाल आकर घरेलू से कामर्शियल बनाने वालों को भरपूर घरेलू सिलेंडर की आपूर्ति कर रही वह सांकरा से करीब तीस किलो मीटर दूर की ग्रामीण वितरक एजेंसी है जबकि उसी कंपनी की एजेंसी मात्र पांच किलो मीटर की दूरी पर भी धरसीवा में है बाबजूद इसके उक्त सरकारी कंपनी की ग्रामीण वितरक की गैस एजेंसी आखिर क्यों तीस किलो मीटर दूर आ रही यदि उज्ज्वला के कनेक्शन ही हैं तो जब उसी कंपनी की पांच किलो मीटर की दूरी पर एजेंसी है तो फिर तीस किलो मीटर की दूरी की एजेंसी से क्यों उज्ज्वला के कनेक्शन दिलाए यदि दिला भी दिए तो उन्हें पांच किलो मीटर के दायरे में मौजूद एजेंसी में ट्रांसफर क्यों नहीं किया गया इन तमाम कारणों से इस व्यापक स्तर पर हो गए घरेलू गैस के अवैध कार्य में उक्त गैस कंपनी के अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठना लाजमी हैं क्या यह सब उच्चाधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है।
इतना ही नहीं यदि कोई कामर्शियल के डिटीब्यूटरों के कामर्शियल सिलेंडर सप्लाई कराने वाले इस अवैध कार्य का विरोध करते हैं तो खाद्य विभाग के अधिकारी भी घरेलू से व्यवसायिक बनाने वालो पर कार्यवाही नहीं करते बल्कि उल्टा कामर्शियल के डिटीब्यूटरों के कामर्शियल सप्लाई कराने वालों को ही निशाने पर लेते हैं