उदयपुरा रायसेन । श्री रामचरितमानस विद्यापीठ के तत्वाधान में चलने वाली मानस यात्रा नगर के समाजसेवी वीरेंद्र सिंह घाना के निज निवास पर पहुंची, जहां पर सत्संग सभा का आयोजन किया गया, पं सुदामा शास्त्री ने मानस ग्रंथ का विधिवत वैदिक पद्धति से पूजन अर्चन करवाया, सत्संग सभा में मानस आचार्य सुरेंद्र शास्त्री ने बताया कि तुलसीदास जी ने अपने मानस ग्रंथ की रचना 1631 में अयोध्या नगरी में की इसी दिन भगवान प्रभु श्री राम का जन्म हुआ, तुलसी ने अपने मानस ग्रंथ के माध्यम से बताया है, कि मानस ग्रंथ को सुनने से शांति मिलती है, एवं मन रूपी हाथी विषय रूपी दावानल में जल रहा है, वह यदि रामचरितमानस रूपी सरोवर में आ पड़े तो सुखी हो जाता है, मानस ग्रंथ के माध्यम से तीनों प्रकार के दोषो, दुखों, और दरिद्ता, को तथा कलयुग की कुचालों और सब पापोंका नाश करने वाला ग्रंथ है।

धर्माधिकारी राजेंद्र प्रसाद शास्त्री ने मानस स्वरूप और उसके महात्म्य पर प्रकाश डाला ,सभा में नर्मदा प्रसाद रामायणी, सुदामा शास्त्री, योगेश पांडे, कैलाश दुबे, ने, अपने सुंदरतम मानस ग्रंथ की उपयोगिता संबंध में, विचार प्रकट किये, मानस यात्रा संयोजक चतुरनारायण अधिवक्ता ने आगामी 1 सितंबर को पांचवी वर्षगांठ उपलक्ष मानस यात्रा महोत्सव पर आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा से सभी को अवगत कराते हुए सहभागी बनने का अनुरोध किया, मानस ग्रंथ की मंगल आरती में निरंजन सिंह राजपूत, जि पंचा प्रतिनिधि राम सिंह चंदेल, रामगोपाल वर्मा, समाजसेवी कृपाल सिंह रघुवंशी, मोहन सिंह रघु, डॉ कमल सिंह, मदन सिंह पटेल, राजकिशोर कौरव, मधु पटेल, अमर सिंह लोधी, गोपाल वर्मा, बृजेशरघु कृषि अधिकारी, रामनाथ जनपद सदस्य, सत्येंद्र रघुवंशी सहित सहित विभिन्न ग्रामों से पधारे हुए मानस प्रेमी श्रद्धालुओं ने भाग लेकर सत्संग श्रवण कर प्रसाद ग्रहण किया,