डॉ.अनिल जैन भोपाल
सरकारी महाविद्यालयों में रिक्त पदों के विरुद्ध सेवा देने वाले अतिथि विद्वानों के लिए आयुक्त उच्च शिक्षा सतपुड़ा भवन ने अतिथि विद्वान नीति 5.10.2023 में आंशिक संशोधन किया है।शब्दों की जादूगरी में अतिथि विद्वानों का मामला हर बार उलझा दिया जाता था वही इस बार भी हुआ।कई महाविद्यालयों के प्राचार्य अतिथि विद्वानों को इल एवं सीएल नही दे रहे थे।तानाशाही रवैया अपना रहे थे इसी को लेकर अतिथि विद्वान महासंघ ने शीर्ष अधिकारियों से मिलकर समस्या बताई जिस पर ओसडी अनिल राजपूत ने पत्र जारी कर स्पष्ट किया की जो आदेश 5.10.2023 को जारी किया गया था उसकी एक लाइन प्रस्तावित किया गया है उसको विलोपित करते हुए प्रसारित किया जाता है लिखा गया है।इसी मामले को लेकर संजय गांधी कॉलेज सीधी सहित कई कॉलेज से अतिथि विद्वानों ने भी शिकायत की थी।
–राष्ट्रीय पर्व का मानदेय देने का आदेश जारी करे सरकार:-डॉ देवराज
वहीं अतिथि विद्वान महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ देवराज सिंह ने मांग की है कि 26 जनवरी एवं 15 अगस्त आदि जो राष्ट्रीय पर्व है उन पर्व पर अतिथि विद्वानों का मानदेय काटा जाता है जो भी बेहद निंदनीय हैं और आज़ाद भारत में संविधान का खुला उलंघन है।डॉ देवराज सिंह ने शीर्ष अधिकारियों से निवेदन कर कहा की अतिथि विद्वानों को अपना अंग मानते हुए अतिथि विद्वानों के हित में निर्णय करें।
इनका कहना हे-
अतिथि विद्वानों की लड़ाई संघर्ष हमेशा न्याय की रही है।अतिथि विद्वानों के साथ दोयम दर्जे का वर्ताव बंद होना चाहिए।अतिथि विद्वानों का फ़िक्स वेतन किया जाए एवं 65 वर्ष उम्र तक की सेवा जारी रखने का संशोधित आदेश जारी किया जाए सरकार की घोषणा के अनुसार तो सभी समस्या का हल हो जाएगा।
डॉ आशीष पांडेय,मीडिया प्रभारी अतिथि विद्वान महासंघ
