गुना। पांच सदियों का इतिहास उठाकर देखें तो अयोध्या में कारसेवा तो कई बार हुई। लेकिन सफलता की अंतिम चोट 1990 और 1992 में ही लगी। इस समय लग रहा था मानो प्रभु श्रीराम के आदर्श कारसेवकों की प्रेरणा बनकर ऊर्जा का संचार कर रहे थे। कारसेवा के दौरान ‘रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे’ नारा गूंजता तो कारसेवक उतने ही जोश के साथ आगे बढ़ जाते थे।
इन्हीं स्मृतियों को ताजा करते हुए 1992 में राम मंदिर निर्माण के लिए कारसेवा का हिस्सा रहे मध्य भारत कारसेवा प्रांत प्रमुख व पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष राधेश्याम पारीक ने राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कई स्मरण सुनाए। उन्होंने बताया कि गुना में राम मंदिर मुक्ति आंदोलन का प्रारंभ 1987-88 में श्रीराम महायज्ञ शिला पूजन से हो चुका था, जिसमें अविभाजित गुना जिले की 600 पंचायतों ने अपनी भागीदारी की थी। गुना जिला उन सौभाग्यशाली जिले में रहा, जिसने तीनों कारसेवा में अपना अमूल्य और महत्वपूर्ण योगदान दिया।