गुरूवार की शाम बेहतरीन थी। देश की कारोबारी राजधानी मुंबई में था। अड़तीस साल पुराने वाग्धारा प्रतिष्ठान के सालाना जलसे में शिरक़त करने का मौक़ा मिला। अँधेरी के मुक्ति सभागार में हुए इस आयोजन में मुल्क़ के अनेक प्रदेशों से अपने अपने क्षेत्रों के धुरंधर पहुँचे थे। प्रतिष्ठान हर साल नवरत्न सम्मान प्रदान करता है। वाग्धारा के निर्णायक मंडल ने मुझे भी इस सम्मान के लायक समझा था।महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री रमेश बैस ने यह सम्मान प्रदान किया ।

आज की राजनीति में साफ़ सुथरे लोग कम ही मिलते हैं ।रमेश जी और मैं 1990 से परिचित हैं और कह सकता हूं कि वे एक शानदार शख्सियत के मालिक हैं । उन्होंने अनेक विभूतियों को सम्मानित किया ।

इनमें लेखिका सुदर्शना द्विवेदी, आशुतोष राणा,अभिनेत्री सीमा विश्वास, अभिनेता वीरेंद्र सक्सेना, जेजे स्कूल ऑफ आर्ट्स,मुंबई के प्राचार्य राजीव मिश्रा,प्रख्यात पंडवानी गायिका ऋतु वर्मा जैसे अनेक मित्र शामिल थे, जो अलग अलग प्रदेशों से आए थे।

इस मौके पर दो ख़ास दोस्तों को शुक्रिया कहना चाहता हूं । दोनों ही शब्द सितारे हैं ।एक तो मुल्क के चोटी के कथाकारों में से एक मेरे चार दशक से भी अधिक समय पुराने यार हरीश पाठक और दूसरे बड़े परदे पर शब्दों का अनूठा संसार रचने वाले भाई रूमी जाफरी अपने अत्यंत व्यस्त कार्यक्रम से समय चुराकर मेरी झोली में डालने अंधेरी के मुक्ति सभागार पहुंचे थे ।

लेकिन मैं कैसे भूल सकता हूं देश के शीर्षस्थ फ़िल्म कला निर्देशक और मेरे चालीस साल पुराने मित्र जयंत देशमुख को ,जिन्होंने मुझे वाग्धारा सम्मान से जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई । जयंत ने कई शानदार फ़िल्मों में अपनी कला की छटा बिखेरी है ।हम सब जयंत के सफ़रनामे के गवाह हैं। हम उन्हें अगले पड़ाव में आस्कर सम्मान के साथ देखेंगे।शुक्रिया जयंत भाई ।

फ़िल्मों और वेब श्रृंखलाओं में अपनी पटकथाओं से झंडे गाड़ने वाले दीपक पचौरी भी इस आयोजन के साक्षी थे । तीन दिन मुंबई में उनकी शानदार मेज़बानी ने दिल जीत लिया । धन्यवाद राजीव और सीमा मिश्र जी।आप लोगों को आभासी माध्यम से ख़बर मिली और आप पधारे ।

जाने माने पत्रकार विमल मिश्र और वाग्देवी परिवार के मौजूदा अध्यक्ष वागीश सारस्वत अपनी टीम के साथ मिलकर मुंबई में वाग्धारा ज्ञानतीर्थ की अलख जगाए हुए हैं ।उनका आभार ।आभासी दुनिया से मित्र संसार में दाख़िल हुईं असीमा भट्ट भी आई थीं।आभार असीमा जी।