57 वां श्री रामचरितमानस सम्मेलन का वार्षिकोउत्सव प्रारंभ मानस ग्रंथ की निकाली गई ग्राम में शोभा यात्रा
उदयपुरा रायसेन। निकटवर्ती ग्राम पचामा श्री रामचरितमानस सम्मेलन की सबसे प्राचीनतम समिति के तत्वाधान में आयोजित, श्री रामचरितमानस सम्मेलन के 57 वे वार्षिक उत्सव का शुभारंभ बड़े धूमधाम से प्रारंभ हुआ

मानस ग्रंथ को विमान पर विराजमान कर ग्राम में शोभायात्रा निकाली गई, मां काली प्रांगण मानस मंच पर विद्वानों के प्रवचन प्रारंभ हुए, मानस आचार्य सुरेंद्र शास्त्री ने मंगलाचरण, गुरु वंदना, राम रूप से जीव मात्र की वंदना, वाल्मीकि, वेद, ब्रह्मा, देवता, शिव पार्वती आदि की वंदना के साथ श्री सीताराम धाम पारिकर वंदना एवं श्री नाम वंदना और नाम महिमा के साथ, श्री राम गुण और श्री रामचरित की महिमा, मानस का रूप और माहात्म आदि का बड़ा ही सहज और सरल, आध्यात्मिक व्याख्या प्रस्तुत की।

भोपाल से पधारे रसाचार्य विष्णु दत्त शास्त्री, ने संगीत की शैली में शिव पार्वती संवाद को श्रवण कराते यह बताया कि शिव पार्वती श्रद्धा और विश्वास का रूप है, राम कथा विश्वास के साथ कहीं जाए, और श्रद्धा के साथ सुनाई जाए, तभी मानव का कल्याण हो सकता है,

मंच का संचालन पंडित सुदामा शास्त्री द्वारा किया गया, सप्त दिवसीय, मानस सम्मेलन का विश्राम दिवस 5 जनवरी को होगा, जिसमें क्षेत्र के नर्मदा अंचल के विद्वान पधार कर मानस पर प्रवचन करेंगे, मानस ग्रंथ की दिव्य मंगल आरती के साथ उपस्थित सभी विद्वानों द्वारा वैदिक मन्त्रों से पुष्पांजलि अर्पित कर सभी के कल्याण के लिए सामूहिक प्रार्थना की एवं प्रसाद वितरण किया गया,