कैलाश पर्वत अष्टापद से आदि तीर्थंकर को हुआ मोक्ष प्राप्त
-कंपायमान हुआ सौधर्म इंद्र का सिंहासन
-श्रीमज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक जिनबिंब प्रतिष्ठा महोत्सव का अंतिम दिवस
सुरेन्द्र जैन रायपुर
धर्म नगरी तिल्दा नेवरा में श्रीमज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक जिन बिंब प्रतिष्ठा के अंतिम दिवस आदि तीर्थंकर भगवान आदिनाथ स्वामी को सात बजकर बाईस मिनिट पर मोक्ष प्राप्त हुआ जैंसे ही आदि तीर्थंकर के जीव को मोक्ष की प्राप्ति होती है उधर स्वर्ग लोक में सौधर्म इंद्र का सिंहासन कंपायमान हो जाता है उन्हें आभास हो जाता है और वह भोग भूमि के कैलास पर्वत अष्टापद पहुचते हैं जहां आदि तीर्थंकर की देह के दर्शन करते हैं और अग्निदेव से अंतिम धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराते हैं ।

पूज्य संत शिरोमणि आचार्यश्री 108 विद्यासागरजी महामुनिराज जी पूज्य मुनिश्री प्रसाद सागर जी पूज्य मुनिश्री निरामय सागर जी पूज्य मुनिश्री चन्द्रप्रभ सागर जी के सानिध्य में व वाणी भूषण बाल ब्रह्मचारी विनय सम्राट भैया जी के प्रतिष्ठा चार्यत्व में महा महोत्व स्थल पर पर मंच पर पूर्ण शुद्धि के साथ भक्ति पूर्ण माहौल में सभी धार्मिक क्रियाओं का मंचन हुआ रजेश जैन रज्जन के कुशल मंच संचालन में मोक्ष कल्याणक संपन्न हुआ।

भक्ति में झूमते रहे भक्त
धर्म नगरी तिल्दा नेवरा में आचार्यश्री के मंगल आशीर्वाद व सानिध्य में वाणी भूषण बाल ब्रह्मचारी विनय सम्राट भैया जी के प्रतिष्ठा चार्यत्व में पंचकल्याणक हेतु सजी अयोध्या नगरी में पूजन विधान श्रीजी के अभिषेक में सुमधर संगीत के साथ मंत्रोच्चारण से भक्ति में सौधर्म इंद्र सहित सभी इंद्र इंद्राणी भक्ति में झूमते हुये पूजन विधान किए।आदि तीर्थंकर भगवान आदिनाथ स्वामी को मोक्ष प्राप्ति के साक्षी बने देश के कोने कोने से पहुचे श्रावक स्वयं को धन्य मानकर बहुत प्रसन्न थे।