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हिंदी में समर्थ एवं सशक्त भाषा के सभी गुण : प्रमोद भार्गव

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– केंद्रीय विद्यालय आईटीबीपी शिवपुरी में हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत हुआ एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

रंजीत गुप्ता शिवपुरी

हिंदी एक समर्थ और सशक्त भाषा है । हिंदी के शब्दकोश में लगभग ढाई लाख शब्द एवं संस्कृत के शब्दकोश में लगभग 25 लाख से एक करोड़ शब्द हो चुके हैं। संस्कृत शब्दकोश के संकलन का कार्य पुणे में चल रहा है । संस्कृत शब्दकोश के 25 खंड प्रकाशित हो चुके हैं । मध्य प्रदेश में चिकित्सा एवं यांत्रिकी की शिक्षा हिंदी में होने लगी है। वास्तु शास्त्र का पुरातन प्रमाण साहित्य में उपलब्ध है दक्षिण भारत के मंदिरों में भी विज्ञान की खोज भारतीय भाषाओं के माध्यम से की जा रही है।
केंद्रीय विद्यालय आईटीबीपी शिवपुरी द्वारा हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत आयोजित एक दिवसीय हिंदी कार्यशाला में शिक्षक-शिक्षिकाओं और अन्य कर्मचारियों को संबोधित करते हुए अपने व्याख्यान में शिवपुरी के प्रसिद्ध लेखक, साहित्यकार एवं पत्रकार प्रमोद भार्गव ने कहा कि हिंदी आत्मबल को बढ़ाती है । हिंदी को दुनिया में पहुंचाने वाले गरीब मजदूर है जिनके साथ हिंदी भाषा विश्व के अनेक देशों तक पहुंची। सऊदी अरब की अदालत की तीसरी भाषा हिंदी है क्योंकि अधिकतम भारतीयों के कारण वहां हिंदी संप्रेषण की भाषा है ।अंग्रेजों ने भारतीय भाषाओं की उपेक्षा की और अपने हित को साधने के लिए अंग्रेजों ने अंग्रेजी को बढ़ावा दिया।
श्री भार्गव ने कहा कि हिंदी का सबसे अधिक नुकसान आर्थिक सक्षमता ने किया है । आर्थिक सक्षमता ने हिंदी की उपेक्षा की । आर्थिक रूप से सक्षम व्यक्तियों ने अपने बच्चों को अंग्रेजी विद्यालयों में भेजना शुरू कर दिया परंतु इसके विपरीत कमजोर, लाचार ,मजदूर वर्ग ने हिंदी का प्रसार देश और विश्व के अनेक देशों में किया। शिक्षकों को निरंतर अध्ययन करना चाहिए क्योंकि अनेक भाषाओं को पढ़ने के बाद ही अन्य भाषाओं से तुलना की जा सकती है। प्रत्येक भाषा में समर्थ है ।अपने ज्ञान को नए-नए रुपए में प्रदर्शन करने के लिए अन्य भाषाओं का ज्ञान आवश्यक है ।भारतीय साहित्य का दृष्टिकोण आशावादी रहा है जबकि पाश्चात्य साहित्य रोमांस एवं निराशावादी हैं।संघर्ष और आशा का साहित्य हमें पढ़नी चाहिए ।भाषाओं का साहित्य विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष देने की प्रेरणा देता है। जिजीविषा को मजबूत करने वाले साहित्य से संघर्ष में जीने की प्रेरणा ले सकते हैं ।
कार्यशाला का शुभारंभ राजभाषा प्रभारी एवम पीजीटी हिंदी मोहन मुरारी मिश्र ने श्री भार्गव का स्वागत करते हुए राजभाषा के उद्देश्य एवं प्रयोग पर विस्तृत प्रकाश डाला। प्रभारी प्राचार्य अभिषेक आर्य ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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