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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के भरोसे वाटर फील्ड टेस्टिंग किट:गांव ज्यादा किट कम,परीक्षण पर संशय

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रिपोर्ट धीरज जॉनसन, दमोह

ग्रामीण अंचलों में पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए पीएचई विभाग द्वारा पंचायत स्तर पर वाटर फील्ड टेस्टिंग किट प्रदान की गई है चूंकि इसकी जांच के लिए प्रशिक्षित व्यक्ति होना भी जरूरी है जिससे दूषित पानी और शुद्धता का सही परिणाम आए इसलिए विभाग से ब्लॉक कोऑर्डिनेटर नियुक्त है जो पंचायतों में एफटीके किट के साथ प्रशिक्षण भी देते है जो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी दी जाती है, कार्यकर्ताओं को एक पुस्तिका भी दी जाती है जिसमें जानकारी एकत्रित करना और रिकॉर्ड रखना पड़ता है।


चूंकि ग्रामीण अंचलों में पेयजल के विभिन्न स्रोत हो सकते है अतः उनका रसायनिक और जीवाणु परीक्षण भी आवश्यक है इसके लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग जो (एफटीके) मल्टी पैरामीटर प्रदान करता है जिससे जल का पी एच, फ्री क्लोरिन, हार्डनेस, क्लोराइड, अल्कालिनिटी, आयरन,नाइट्रेट, फ्लोराइड,अमोनिया, टर्बिडिटी इत्यादि नापा जाए इसके लिए प्रयोग विधि पुस्तिका भी सामने आई जिससे जब जल परीक्षण किया जाए तो विवरण भरने की पुस्तिका में परीक्षण कर्ता जानकारी दर्ज करेगा।

हालांकि ग्राम पंचायतों को किट देने का काम काफी सालों से जारी है वैसे तो आगनबाड़ी कार्यकर्ता टेस्ट करते है और कमी की जानकारी ऑन लाइन दर्ज की जाती है जिसके आधार पर क्लोरीनेशन इत्यादि किया जा सके और रिकॉर्ड पुस्तक में लिखे जाते हैं। इस संबंध में पीएचई के सहायक यंत्री अशोक मुकाती बताते है कि उनके सेक्टर में 131 पंचायतों को किट बांटी गई,आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को किट एवं सेक्टर में ट्रेनिंग दी जाती है रिपोर्ट उन्ही को अपने पास रखना पड़ती है।दमोह, पथरिया,जबेरा तेंदूखेड़ा, हटा, बटियागढ़ के लिए ब्लॉक कोऑर्डिनेटर है जिन्हें किट बांटना और प्रशिक्षण देने का काम है।इंफरमेशन,एजुकेशन, कम्युनिकेशन के लिए भी अलग से नियुक्ति है,


पीएचई के लैब केमिस्ट के अनुसार 2021- 22 में 460 किट आई थी। एवं 2022- 23 ने 600 किट आई जो 460 पंचायत को ब्लॉक कोऑर्डिनेटर द्वारा दी गई जिसमें से 50 जल निगम को,10 वाटर हेड को दी जाएगी इनकी रिपोर्ट ऑन लाइन जाती है,2022- 23 में 131 प्रदूषित स्रोत की जानकारी जिले से प्राप्त हुई जिसका जिला प्रयोगशाला द्वारा रेमेडियल एक्शन लिया गया। इस संबंध में जल निगम के अनुसार जहां पूर्व में किट नहीं बांटी गई वहां मोबलाइजर को जिला लैब में प्रशिक्षित कर भेजा गया।

परंतु जब एक ग्राम पंचायत के अंतर्गत ही एक से अधिक ग्राम होते है तो इस तुलना में किट वितरण संख्या कम प्रतीत होती है साथ ही इनकी मॉनिटरिंग पर भी संशय है क्योंकि धरातल पर ग्रामीणों को इसकी जानकारी अभी भी न्यूनतम है।

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