सुरेन्द्र जैन धरसीवा
एक ओर जहां उरला सिलतरा ओधोगिक क्षेत्र की ओधोगिक इकाइयों के बढ़ते प्रदूषण ने ग्रामीणो का जीना मुहाल कर दिया है और भूजल तक केमिकल युक्त कर दिया है तो वहीं दूसरी ओर फेक्ट्रियो के विस्तार की जनसुनवाई तक प्रशासन और ग्राम पंचायतों की मिलीभगत से गुपचुप तरीके से की जा रही हैं.ऐंसा ही मामला गुरुवार को एक बार फिर सामने आया है।

एमपी टूडे की नजर ओधोगिक क्षेत्र सिलतरा के फेस टू स्थित सीएसआईडीसी कार्यलय के सामने पड़ी जहां टेंट लगा देख इस संवाददाता ने टेंट कर्मियो से बात की तो पता चला की कोई फैक्ट्री वाले ओर अधिकारी लोग एवं फेक्ट्रियो के श्रमिक यहां आए थे लेकिन क्या कार्यक्रम हुआ था पता नहीं।आख़िर टेंट क्यों लगा यहां क्या कार्यक्रम हुआ इसकी जानकारी लेने तहसीलदार से संपर्क का प्रयास किया लेकिन संपर्क नहीं हुआ तब टीआई धरसीवा शिवेंद्र सिंह राजपूत से बात करने पर पता चला कि कोई श्रीराम नवीन कुमार नामक फेक्ट्री के विस्तार की जनसुनवाई हुई थी आज 11 बजे से 2 बजे तक का समय था.इधर इस मामले में जब ग्रामीणो से संपर्क किया तो आसपास के किसी भी गांव में इस जनसुनवाई की कोई मुनादी तक नहीं हुई।

ओधोगिक इकाइयों के विस्तार की जनसुनवाई कुछ ग्राम पंचायतों व प्रशासन की मिलीभगत से गुपचुप तरीके से फेक्ट्री श्रमिको कर्मचारियों की भीड़ जुटाकर की जाने से प्रदूषण से हलाकान ग्रामीणो में आक्रोश है.
ज्ञात रहे कि बढ़ते प्रदूषण से सांकरा सोण्डरा कन्हरा सिलतरा आदि गांवो के ग्रामीण भारी हलाकान हैं और कन्हरा का तो भूजल तक केमिकल युक्त हो चुका है।