गांधीनगर स्वास्थ्य केंद्र को सिविल अस्पताल का दर्जा देने से इंकार मरीजों को नहीं मिल पा रही सुविधाएं
भोपाल। गांधीनगर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सिविल अस्पताल का दर्जा देने के प्रस्ताव पर अमल नहीं हो सका है। स्वास्थ्य विभाग ने यहां मरीजों की कम संख्या को देखते हुए प्रस्ताव को ही खारिज कर दिया। यहां के रहवासियों का कहना है कि जब अस्पताल में सुविधाएं नहीं हैं तो मरीज कहां से जाएंगे। चिकित्सकों की भी कमी महसूस की जा रही है।
अस्पताल को सिविल दर्जा देने की घोषणा ढाई साल पहले स्वास्थ्य मंत्री डा. प्रभुराम चौधरी ने की थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने यहां सर्वे कराया। सर्वे में पाया गया गया कि इस अस्पताल में मरीजों की संख्या कम है। छह माह की ओपीडी को आधार मानकर विभाग ने सिविल दर्जा देने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। यह प्रस्ताव खारिज होने के कुछ समय बाद बैरागढ़ सिविल अस्पताल के नए विंग का भूमिपूजन करने आए स्वास्थ्य मंत्री ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा था कि गांधीनगर अस्पताल को सिविल का दर्जा भले ही न मिल पाए, लेकिन हम सुविधाएं बढ़ाएंगे। उनके इस कथन के बाद भी सुविधाएं बढ़ने के बजाय कम हो गई हैं। अस्पताल में सोनाग्राफी, एक्सरे जैसी जांच के लिए मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है।
चिकित्सक भी कम, लौट जाते हैं मरीज
अस्पताल में चिकित्सकों की संख्या लगातार कम हो रही है। किसी समय यहां पर 10 चिकित्सक हुआ करते थे। अब यह संख्या मात्र तीन रह गई है। आबादी लगातार बढ़ रही है लेकिन चिकित्सक कम हो रहे हैं। रहवासियों के अनुसार उन्हें कई बार अस्पताल से वापस लौट जाना पड़ता है क्योंकि चिकित्सक नहीं मिलते। अस्पताल में महिला चिकित्सक नहीं होने से महिलाओं को परेशान होना पड़ रहा है। रहवासी कई बार इसकी शिकायत प्रशासन से कर चुके हैं, लेकिन किसी का ध्यान नहीं है। पार्षद लक्ष्मण राजपूत के अनुसार हमने स्वास्थ्य मंत्री से अस्पताल का निरीक्षण कर जरूरी सुविधाएं बढ़ानें, चिकित्सकों की संख्या पहले की तरह 10 करने एवं नर्सिग स्टाफ बढ़ाने का आग्रह किया है। उल्लेखनीय है कि इस अस्पताल पर इलाके की करीब 50 हजार आबादी की स्वास्थ्य सेवाओं का जिम्मा है।
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