सातवें धर्म-धम्म सम्मेलन के समापन सत्र में नए युग में पूरब के मानववाद पर 50 से ज्यादा विद्वानों ने अपने शोध पत्र पढ़े
-केंद्रीय उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने वीडियो संदेश के जरिये
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-युद्ध से कराहती दुनिया की आस भारत का मानववाद
भोपाल। सातवें धर्म-धम्म सम्मेलन के समापन सत्र में नए युग में पूरब के मानववाद पर 50 से ज्यादा विद्वानों ने अपने शोध पत्र पढ़े।
केंद्रीय उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने वीडियो संदेश के जरिये कहा कि पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है। उन्होने कहा कि सनातन और बौद्ध धर्म में कई समानताएं है और तिब्बती बौद्ध धर्म में मंडला एवं अन्य पद्धतियां नालंदा विश्वविद्यालय में तैयार की गई। श्री सिंधिया ने बताया कि कैलाश पर्वत हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों में आस्था का केंद्र है। श्री सिंधिया ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सास्कृतिक चेतना की नई लहर शुरु करने का जिक्र करते हुए कहा कि बौद्ध पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बौद्ध सर्किट को केंद्र में रखकर हवाई मार्ग तैयार किए गए है।

समापन सत्र में थाइलैंड के सिल्पाकोरोन विश्वविद्यालय के प्रो चिरापत प्रपद्यविद्या ने कहा कि बौद्ध धर्म में एकात्म का सिद्धांत है और पुनर्जन्म के चक्र से निकलने हेतु विद्या रूपी अनंत सत्य को जानने का सिद्धांत बुद्ध ने बताया है। उन्होने कहा कि थाइलैंड में भी सांची के समान स्तूप है जिसका पुनरुद्धार किया जा रहा है। नालंदा केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रो गोदावरीश मिश्र ने अपने संबोधन में कहा कि अंग्रेजों ने मनुस्मृति का अपनी सुविधानुसार अनुवाद किया और उसे हिंदूओं को बांटने में उपयोग किया। उन्होने उदाहरण से समझाया कि आर्य और द्रविड़ का भेद नहीं है बल्कि गौड़ा और द्रविड़ का भेद है जो खान-पान में अंतर पर आधारित है।

समापन सत्र में कोलकाता विवि के प्रो दिलीप मोहंता ने बताया कि पूरा विश्व एक घोंसला है एवं शांति और संपन्नता एक दूसरे से जुड़े हुए है व हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रामनाथ झा ने कहा कि प्रकृति का मूल एक है जो पुरुष और स्त्री शक्ति के रुप अलग-अलग उद्घाटित होती है। उन्होने कहा कि महर्षि वेदव्यास, वाल्मिकी, जाबाली और ऐतरेय ब्राह्मण लिखने वाले महिदर ऋषि ब्राहृमण नहीं थे और वेदों में 27 ऋषिकाओं का जिक्र आता है, ऐसे में सनातन धर्म को ब्राह्मण आधारित वर्ण व्यवस्था से जोड़ना कल्पना ही है।

कोलकाता विवि में पाली की प्रोफेसर शाश्वती ने कहा कि रविन्द्रनाथ टैगोर पर बौद्ध धर्म का बड़ा प्रभाव था । उहोने पाली साहित्य से उदाहरण देते हुए प्रार्थना की जिसका अर्थ था कि ब्रहमांड के सभी जीव खुश रहे। समापन भाषण और कॉन्फ्रेस रिपोर्ट देते हुए सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर अलकेश चतुर्वेदी ने कहा कि उद्घाटन सत्र, मंत्री संवाद, 5 मुख्य सत्रों और 150 शोध पत्रों से यहीं परिलक्षित हुआ है कि भारतीय संवेदना में पोषित मानववाद सदियों के परिमार्जन का सोमरस है और हिंसा और विवादों से जूझ रहे विश्व को पूर्व का मानववाद काफी कुछ सिखा सकता है।

सत्र की शुरुआत में सभी प्रतिभागियों ने ओंकारेश्वर में तैयार हो रहे एकात्म लोक से जुड़ी एक लघु फिल्म भी देखी। दोपहर में सभी प्रतिभागियों ने विश्व प्रसिद्ध सांची स्तूप का भ्रमण किया। सातवां धर्म धम्म सम्मेलन इस मायने में खास रहा कि इस बार 16 देशों से प्रतिभागियों ने सहभागिता की। दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश इंडोनेशिया के बाली के उपराज्यपाल ने भारत को बड़ा भाई बताया।

इंडोनेशिया, भूटान और श्रीलंका से मंत्री इस सम्मेलन में शामिल हुए। पहली बार रूस के 4 राज्यों से बौद्ध लामा और थाइलैंड से बौद्ध भंते सम्मेलन में शरीक हुए। म्यामांर और मंगोलिया के राजदूत भी सम्मेलन में शरीक हुए और सांची विवि के साथ अकादमिक साझेदारी की इच्छा जताई।