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फाल्गुन अष्टमी से होलिका दहन तक आठ दिनों तक होलाष्टक के दौरान मांगलिक और शुभ कार्य होते है बर्जित

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फाल्गुन अष्टमी से होलिका दहन तक आठ दिनों तक होलाष्टक के दौरान मांगलिक और शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है। हालांकि इन आठ दिनों तक कोई शुभ कार्य नहीं किए जाते लेकिन देवी देवता की आराधना क लिए यह बहुत ही शुभकारी दिन माने जाते हैं।

17 फरवरी से फाल्गुन मास का आरंभ हो जाएगा। इसी मास में रंगों का पर्व होली भी मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में होली के पर्व का विशेष महत्व है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होली का पर्व मनाया जाता है। लेकिन फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से ही होलाष्टक लग जाता है। फाल्गुन अष्टमी से होलिका दहन तक आठ दिनों तक होलाष्टक के दौरान मांगलिक और शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है। हालांकि इन आठ दिनों तक कोई शुभ कार्य नहीं किए जाते लेकिन देवी देवता की आराधना क लिए यह बहुत ही शुभकारी दिन माने जाते हैं। आइए जानते हैं कब से लग रहा होलाष्टक और इस दौरान किन कार्यों को करने की होती है मनाही।

होलाष्टक 10 मार्च 2022, गुरुवार से लेकर 17 मार्च 2022, गुरुवार तक रहेगा। मान्यता है कि इस दौरान किसी भी शुभ कार्य को करना अपशकुन होता है। होलाष्टक से होली और होलिका दहन की तैयारी शुरु हो जाती है।

होलाष्टक के आठ दिनों को शुभ कार्य नहीं करने के पीछे पौराणिक कथा है जिसके अनुसार कामदेव द्वारा भगवान शिव की तपस्या भंग करने के कारण फाल्गुन शुक्ल अष्टमी तिथि पर क्रोध में आकर कामदेव को भस्म कर दिया था। अन्य कथा के अनुसार राजा हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका के साथ मिलकर पाने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से दूर करने के लिए इन आठ दिनों में कठिन यातनाएं दी थीं।  इसलिए होलाष्टक काल को विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन समारोह आदि जैसे शुभ कार्यों को करने के लिए अशुभ माना जाता है।

फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक लग जाता है।  होलाष्टक लगते ही हिंदू धर्म से जुड़े सोलह संस्कार समेत कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।  चाहे कोई नया घर खरीदना हो या कोई नया व्यवसाय शुरू करना हो सभी शुभ कार्य रोक दिये जाते हैं। यदि इस दौरान किसी की मृत्यु हो जाती है तो उनके अंतिम संस्कार के लिए भी शांति कराई जाती है। एक मान्यता अनुसार किसी भी नविवाहिता को अपने ससुराल की पहली होली नहीं देखनी चाहिए।

एक तरफ होलाष्टक में 16 संस्कार समेत कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है, वहीं यह समय भगवान की भक्ति के लिए भी उत्तम माना जाता है। होलाष्टक के दौरान दान-पुण्य करने का विशेष फल प्राप्त होता है। इस दौरान मनुष्य को अधिक से अधिक भगवत भजन और वैदिक अनुष्ठान करने चाहिए, ताकि समस्त कष्टों से मुक्ति मिल सके। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से हर तरह के रोग से छुटकारा मिलता है और सेहत अच्छी रहती है।

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