– ई-टोकन व्यवस्था किसानों के लिए बनी परेशानी, पोर्टल नहीं कर रहा काम, 150 से 200 किमी दूर मिल रही खाद की बुकिंग
सैयद मसूद अली पटेल गैरतगंज रायसेन
रबी सीजन की बोवनी के बीच गैरतगंज तहसील में खाद की किल्लत से किसान परेशान हैं। स्थिति यह है कि क्षेत्र में डीएपी खाद की उपलब्धता शून्य बताई जा रही है, जबकि खाद वितरण के लिए लागू ई-टोकन व्यवस्था भी किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। किसानों का कहना है कि टोकन होने के बावजूद खाद नहीं मिल पा रही है। वहीं, पोर्टल में तकनीकी समस्या के चलते बुकिंग की प्रक्रिया भी सुचारू रूप से नहीं चल रही है। किसानों के अनुसार, कई बार पोर्टल पर खाद की बुकिंग करने का प्रयास किया जाता है, लेकिन तकनीकी समस्या के कारण बुकिंग नहीं हो पाती। यदि कभी बुकिंग हो भी जाती है तो किसानों को 150 से 200 किलोमीटर दूर स्थित केंद्रों पर खाद लेने के लिए भेजा जा रहा है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ समय की बर्बादी और अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ रही है।
महंगे दाम पर मिल रही एनपीके खाद
खाद की कमी के बीच एनपीके 12:32:16 की एक बोरी का मूल्य करीब 2450 रुपए बताया जा रहा है, जो गत वर्ष की तुलना में लगभग दोगुना है। वहीं डीएपी की तुलना में एनपीके कम असरकारक है। ऐसे में किसानों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। क्षेत्र के अनेक किसानों ने खाद की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने के कारण मजबूरी में बिना खाद के ही बोवनी कर दी है। किसानों को आशंका है कि समय पर खाद नहीं मिलने से फसलों की शुरुआती बढ़वार और उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
किसान संगठन ने जताया आक्रोश
खाद संकट और ई-टोकन व्यवस्था की अव्यवस्थाओं को लेकर किसान संगठन के मुकेश धाकड़ ने आक्रोश जताया है। उन्होंने कहा कि एक ओर किसान रबी सीजन की बोवनी और फसल की तैयारी में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर खाद के लिए उन्हें पोर्टल, टोकन और दूरस्थ वितरण केंद्रों की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन और संबंधित विभाग से खाद वितरण व्यवस्था में तत्काल सुधार करने, डीएपी की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा ई-टोकन पोर्टल को सुचारू रूप से संचालित कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि कृषि कार्य का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में खाद के लिए किसानों को परेशान होना पड़ रहा है। यदि जल्द ही व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो इसका सीधा असर रबी फसलों की पैदावार पर पड़ सकता है।