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वापोली धाम से संतों का शंखनाद: 4 दिसंबर को ‘चलो भोपाल’

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गो-सम्मान आह्वान अभियान के लिए तीन जिलों के संत-महात्मा हुए एकजुट, बोले—सृष्टि के मूल में है गोमाता

महामंडलेश्वर ब्रह्मर्षि ब्रह्मचारीजी महाराज का आह्वान—एकजुट होकर भारत से गोहत्या का कलंक मिटाना ही होगा

संतों ने चेताया—गाय बचेगी, तभी पृथ्वी और सृष्टि का कल्याण होगा; अब नहीं चेते तो पछताना पड़ेगा

कमल याज्ञवल्क्य बरेली रायसेन

गोमाता के सम्मान, संरक्षण और संवर्धन के संकल्प के साथ गो-सम्मान आह्वान अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से रायसेन जिले की बरेली तहसील स्थित प्रसिद्ध वापोली धाम में संत-सभा का आयोजन किया गया। सभा में रायसेन, नर्मदापुरम और नरसिंहपुर जिलों के विभिन्न मठ-मंदिरों के मठाधीशों, संत-महात्माओं तथा लगभग दो दर्जन गांवों के नागरिकों ने सहभागिता की। सभा में संतों ने गोमाता की रक्षा को धार्मिक आस्था के साथ ही सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्व बताते हुए 4 दिसंबर को भोपाल में आयोजित गो-सम्मान कार्यक्रम में अधिकाधिक संख्या में पहुंचने का आह्वान किया।

आयोजन में महामंडलेश्वर ब्रह्मर्षि ब्रह्मचारीजी महाराज की विशिष्ट सन्निधि, मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्राप्त हुआ। वहीं वापोली धाम आश्रम में 16 वर्षों से क्षेत्र-संन्यास व्रत के अंतर्गत साधनारत तपस्वी संतश्री जम्मूवाले गुरुजी लाल बाबाजी महाराज का सान्निध्य एवं संयोजन रहा। राजस्थान में नंदबाबा के नाम से विख्यात संतश्री सनातनजी महाराज की विशेष उपस्थिति ने सभा को महत्वपूर्ण स्वरूप प्रदान किया।

सृष्टि के मूल में है गोमाता : ब्रह्मर्षि ब्रह्मचारीजी महाराज

महामंडलेश्वर ब्रह्मर्षि ब्रह्मचारीजी महाराज ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में गोमाता को सृष्टि के मूल और लोककल्याण का आधार माना गया है। स्कंदादि पुराणों में गोमाता की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है तथा वेदों में भी गोमहिमा से संबंधित अनेक मंत्र हैं। उन्होंने वेद-लक्षणा गोमाता की महिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि गाय विश्व की माता है और उसकी दुर्दशा प्रत्येक संवेदनशील व्यक्ति के लिए पीड़ादायक है।

महाराजश्री ने कहा कि सड़कों पर भटकती, असहाय और कष्ट झेलती गोमाता की स्थिति चिंताजनक है। अस्सी लाख योनियों में मनुष्य को प्राप्त विवेक और सामर्थ्य के साथ गोमाता की रक्षा एवं सुरक्षा का दायित्व भी जुड़ा है। इसलिए यह केवल किसी एक व्यक्ति, संस्था या संप्रदाय का विषय नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज का उत्तरदायित्व है।

उन्होंने आह्वान किया कि गो-सम्मान आह्वान अभियान में सभी लोग एकजुट होकर सहभागी बनें और भारत से गोहत्या का कलंक मिटाने के लिए संकल्पबद्ध हों। उन्होंने कहा कि इस दिशा में अब निर्णायक प्रयास करने का समय है। महाराजश्री ने 4 दिसंबर को भोपाल में होने वाले गो-सम्मान कार्यक्रम में पूर्ण सहयोग का आश्वासन देते हुए कहा कि भोपाल आने-जाने के लिए 100 से 200 बसों तक का खर्च वह अपनी ओर से देने को तैयार हैं। उन्होंने संतों, श्रद्धालुओं और आम नागरिकों से बड़ी संख्या में भोपाल पहुंचने की अपील करते हुए कहा कि इस अभियान में रायसेन जिला मिसाल बने।

‘गाय की रक्षा में ही स्वयं की रक्षा है’ : तपस्वी संतश्री लाल बाबाजी महाराज

वापोली धाम आश्रम में 16 वर्षों से क्षेत्र-संन्यास व्रत के अंतर्गत तपस्यारत संतश्री जम्मूवाले गुरुजी लाल बाबाजी महाराज ने अपने सरल, स्पष्ट और प्रभावशाली शब्दों में गोसेवा की महत्ता प्रतिपादित की। उन्होंने कहा कि पूज्य गुरुजी वापोली वालों से उन्होंने सुना है कि गोमाता की रक्षा और सम्मान के लिए पूज्य करपात्रीजी महाराज सहित अनेक संतों ने अभियान चलाकर समाज में जनजागरण के प्रयास किए हैं। गोमाता के सम्मान के लिए संतों और जनता ने लंबे समय तक संघर्ष किया है, इसलिए अब किसी भी प्रकार की चूक नहीं होनी चाहिए।

लाल बाबाजी महाराज ने कहा कि गोमाता की रक्षा में ही स्वयं की रक्षा निहित है। उन्होंने शास्त्रीय मान्यताओं का उल्लेख करते हुए गोसेवा को पापों से मुक्ति, आत्मशुद्धि और कल्याण का माध्यम बताया। उनके अनुसार, इस युग में गोमाता प्रत्यक्ष देवस्वरूप हैं और उनकी सेवा मानव जीवन का महत्वपूर्ण धर्म है।

उन्होंने कहा कि गो-सम्मान आह्वान अभियान में संत-महात्मा सहयोग कर रहे हैं। समाज के प्रत्येक वर्ग को भी इसमें अपनी सहभागिता सुनिश्चित करनी चाहिए। गोमाता के प्रति हिंसा और उपेक्षा समाप्त होना आवश्यक है। उन्होंने गोमाता के रक्त से धरती को मुक्त करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि तभी व्यापक कल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा।

धर्म की विजय के लिए अधर्म का नाश आवश्यक : संतश्री सनातनजी महाराज

राजस्थान में नंदबाबा के नाम से विख्यात संतश्री सनातनजी महाराज ने गो-सम्मान आह्वान अभियान की पृष्ठभूमि, उद्देश्य और चरणबद्ध कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गोमाता के सम्मान और संरक्षण के विषय पर वृंदावन धाम में तीन महीने तक संत-महात्माओं के विचार-विमर्श के बाद इस अभियान को प्रारंभ करने की आवश्यकता महसूस हुई।उन्होंने कहा कि यह पांच चरणों में संचालित होने वाला अभियान है, जो बिना दान और चंदा एकत्र किए आगे बढ़ाया जा रहा है। अभियान का चौथा चरण 4 दिसंबर को मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित होगा। उन्होंने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि गोमाता की रक्षा अत्यंत आवश्यक है और समाज को गोमाता के दूध का ऋण चुकाने के लिए आगे आना चाहिए।

संतश्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गोमाता के सम्मान और संरक्षण के लिए अब और विलंब नहीं किया जा सकता। यह किसी एक व्यक्ति या संगठन का नहीं, बल्कि समूचे समाज का अभियान है। उन्होंने बताया कि अभियान के अंतर्गत अब तक 35 करोड़ हस्ताक्षर हो गए और 51 करोड़ हस्ताक्षरों की आवश्यकता होने की जानकारी भी दी।

उन्होंने अभियान की विशिष्ट अवधारणा का उल्लेख करते हुए बताया कि इसमें वेद-लक्षणा गोमाता, आद्यशक्ति मां सुरभि को प्रधान संरक्षक तथा नंदी बाबा, नीलमणि वृषभ देव को अध्यक्ष के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। उन्होंने कहा कि गोसेवा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का भी महत्वपूर्ण स्वरूप है।

वापोली धाम से क्षेत्र में गोसम्मान अभियान में शामिल होने का संदेश

सभा का प्रभावी संचालन संतश्री नेपाली बाबाजी ने किया।सभा में उपस्थित अनेंक संत-महात्माओं ने गोमाता के सम्मान, संरक्षण और सुरक्षा के लिए समाज को एकजुट होने का संदेश दिया। वक्ताओं ने कहा कि गोसंरक्षण के प्रति केवल भावनात्मक समर्थन पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए सामूहिक जागरूकता, जिम्मेदारी और निरंतर प्रयास भी आवश्यक हैं।

वापोली धाम की इस संत-सभा से 4 दिसंबर को भोपाल में आयोजित गो-सम्मान कार्यक्रम के लिए व्यापक सहभागिता का आह्वान किया गया। संतों ने श्रद्धालुओं और नागरिकों से अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील करते हुए कहा कि गोमाता के प्रति सम्मान, करुणा और संरक्षण की भावना को जनजीवन का अभिन्न अंग बनाना समय की आवश्यकता है। गोमाता का सम्मान, संरक्षण और सेवा समाज के सामूहिक संकल्प से ही प्रभावी रूप ले सकते हैं। अभियान के मुख्य उद्देश्य के तहत सम्पूर्ण भारत में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगे तथा गोमाता को राष्ट्र माता अथवा राष्ट्र आराध्या का संवैधानिक पद प्रदान कर राष्ट्रीय सम्मान दिया जाए आदि शामिल हैं।

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