राहुल राजोरिया रायसेन
मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए हर महीने करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है लेकिन रायसेन से आई यह खबर आपको हैरान भी करेगी और डराएगी भी जिस जननी 108 एंबुलेंस के भरोसे गर्भवती महिलाएं और गंभीर मरीज अपनी सांसें गिनते हुए अस्पताल पहुंचते हैं, वो खुद वेंटीलेटर पर है नोडल अधिकारी के औचक निरीक्षण में खुलासा हुआ कि मरीज को दी जाने वाली ऑक्सीजन का प्रेशर ही गायब है और गाड़ियों के टायरों से लोहे के तार बाहर झांक रहे हैं!
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स्वीरों में दिखाई दे रहा यह औचक निरीक्षण रायसेन जिले का है जहां स्वास्थ्य विभाग के जननी 108 नोडल अधिकारी डॉ. एमडी भारती जब गाड़ियों का जायजा लेने पहुंचे, तो उनके भी होश उड़ गए। निरीक्षण के दौरान आपातकालीन स्थिति में मरीज को जीवन देने वाले ऑक्सीजन सिलेंडर का प्रेशर चेक किया गया जहां स्थिति बेहद निराशाजनक मिली सवाल यह है कि अगर किसी गंभीर मरीज को रास्ते में ऑक्सीजन की सख्त जरूरत पड़े तो बिना प्रेशर वाले सिलेंडर के भरोसे उसकी जान कैसे बचेगी।

ऑक्सीजन के बाद जब गाड़ियों की फिटनेस और टायरों की जांच हुई तो वेंडर कंपनी की लापरवाही की परतें और उधड़ गईं। एंबुलेंस में लगी स्टेपनी और मुख्य टायर पूरी तरह घिस चुके थे और रबर के अंदर से लोहे के तार बाहर झांक रहे थे। यानी मरीजों को लेकर 80 और 100 की रफ्तार में दौड़ने वाली ये गाड़ियां किसी भी वक्त बड़े हादसे का शिकार हो सकती है
एंबुलेंस का जिम्मा संभालने वाली ठेका कंपनी जय अम्बे इमरजेंसी सर्विसेज की इस बेपरवाही पर नोडल अधिकारी पहले भी कई बार पत्राचार कर चुके हैं लेकिन सुधार के नाम पर ज़ीरो काम हुआ है। सरकार हर महीने कंपनी को करोड़ों रुपये का भुगतान करती है लेकिन मेंटेनेंस के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है।

यह हाल तब है जब कुछ ही दिन पहले रायसेन के बाड़ी में मरीज को समय पर एंबुलेंस न मिलने पर खुद स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने वेंडर कंपनी के प्रोजेक्ट हेड को जमकर फटकार लगाई थी मंत्री की सख्त हिदायत के बावजूद अगर व्यवस्था नहीं सुधरी तो समझ लीजिए कि निजी कंपनियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं।