आधे दिन की छुट्टी से शुरू हुआ संघर्ष, अब दुनिया की महिलाओं के अधिकार की आवाज बनीं रंजीता प्रियदर्शनी
सत्यवन गोस्वामी बेगमगंज/सुल्तानगंज रायसेन
कभी मासिक धर्म के दौरान महज आधे दिन की छुट्टी के लिए संघर्ष करना पड़ा था, लेकिन यही व्यक्तिगत अनुभव आगे चलकर एक ऐसे अभियान की नींव बना, जिसकी गूंज आज महिलाओं के अधिकारों के वैश्विक मंच तक पहुंच चुकी है। मेटल इंडस्ट्रीज में काम करने के दौरान पीरियड के समय अवकाश नहीं मिलने की परेशानी झेलने वाली ग्लोबल कैंपेनर एवं ‘पेड पीरियड लीव’ की संस्थापक रंजीता प्रियदर्शनी अब महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान सम्मान, स्वास्थ्य और अधिकार दिलाने की मुहिम चला रही हैं।

इसी संघर्ष और जागरूकता की प्रेरक कहानी लेकर रंजीता प्रियदर्शनी शनिवार को बेगमगंज के पी.एम. श्री कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पहुंचीं। यहां “मासिक धर्म : जागरूकता से अधिकार तक” विषय पर आयोजित विशेष जागरूकता कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राओं और महिला शिक्षिकाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में रंजीता प्रियदर्शनी मुख्य अतिथि रहीं, जबकि विकासखंड शिक्षा अधिकारी राजेंद्र श्रीवास्तव अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

कार्यक्रम का सबसे खास आकर्षण रंजीता प्रियदर्शनी के संघर्ष और उनके अभियान की यात्रा पर आधारित डॉक्यूमेंट्री रही। छात्राओं ने देखा कि कैसे व्यक्तिगत परेशानी से शुरू हुआ एक सवाल धीरे-धीरे आंदोलन में बदल गया और आज दुनिया की कामकाजी महिलाओं के लिए पेड पीरियड लीव के अधिकार की आवाज बन चुका है।
इस पूरे जागरूकता अभियान को प्रभावी रूप देने में डायरेक्टर प्रदीप नायक,प्रोड्यूसर रंजनदास ,प्रोड्यूसर जगमोहन त्रिपाठी की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। कार्यक्रम के दौरान वे सक्रिय रूप से मौजूद रहे और जागरूकता अभियान के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की दिशा में जुटे नजर आए। रंजीता प्रियदर्शनी के संघर्ष, उनके अभियान और छात्राओं तक स्वास्थ्य एवं अधिकार का संदेश पहुंचाने की इस पहल में जगमोहन त्रिपाठी की मौजूदगी विशेष रूप से चर्चा में रही।

कार्यक्रम में छात्राओं और महिला शिक्षिकाओं को सैनिटरी पैड के सही उपयोग, व्यक्तिगत स्वच्छता, मासिक धर्म के दौरान स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों तथा पीरियड से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों और भेदभाव को समाप्त करने के बारे में जानकारी दी गई। छात्राओं को बताया गया कि मासिक धर्म कोई शर्म या छिपाने का विषय नहीं, बल्कि प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया और स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।

रंजीता प्रियदर्शनी ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि “मासिक धर्म शर्म नहीं, स्वास्थ्य और सम्मान का विषय है।” उन्होंने छात्राओं से अपील की कि वे स्वयं जागरूक बनें और अपने परिवार व समाज में भी मासिक धर्म को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने की आवाज बनें।
उन्होंने बताया कि उनका संघर्ष व्यक्तिगत समस्या से शुरू हुआ था, लेकिन समय के साथ यह अभियान लाखों महिलाओं के अधिकारों से जुड़ गया। उनके अभियान के बाद भारत के कर्नाटक, बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों में भी महिलाओं के लिए पेड पीरियड लीव से जुड़े प्रावधानों की दिशा में पहल हुई है।

विकासखंड शिक्षा अधिकारी राजेंद्र श्रीवास्तव ने अभियान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम छात्राओं में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के साथ-साथ संवेदनशीलता और आत्मविश्वास विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में प्रोड्यूसर जगमोहन त्रिपाठी सहित विद्यालय की महिला शिक्षिकाएं और बड़ी संख्या में छात्राएं मौजूद रहीं। यह आयोजन मासिक धर्म को लेकर चुप्पी और सामाजिक संकोच तोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।