जिला चिकित्सालय रायसेन ने रचा इतिहास: जिले में पहली बार दूरबीन पद्धति से हुआ बच्चेदानी का जटिल ऑपरेशन
रायसेन।जिला चिकित्सालय (DH) रायसेन में स्वास्थ्य सुविधाओं ने एक नया आयाम स्थापित किया है। शनिवार को अस्पताल के स्त्री रोग विभाग (OBGYN) ने जिले में पहली बार दूरबीन पद्धति से बच्चेदानी निकालने की जटिल सर्जरी (Total Laparoscopic Hysterectomy) को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इस ऐतिहासिक ऑपरेशन में जिले में पहली बार ‘इंट्रा-कॉर्पोरियल सूचरिंग’ (Intra-corporeal Suturing) तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया। वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन और डॉक्टरों की उत्कृष्ट टीम वर्क के चलते यह बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है।
मरीज की गंभीर स्थिति और बीमारी का इतिहास
ग्राम बांछोर, जिला रायसेन निवासी 50 वर्षीय रजनी (पत्नी श्री मुन्ना लाल) को 19 मई 2026 को जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। मरीज पिछले 3 वर्षों से भारी मासिक धर्म (Heavy Menstrual Bleeding) की समस्या से जूझ रही थीं और पिछले 15 दिनों से उन्हें लगातार अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था। सर्जरी से पूर्व 3 माह तक उनका दवाओं से भी इलाज किया गया, लेकिन कोई आराम नहीं मिला। अस्पताल में गहन जांच के बाद उन्हें ‘एडेनोमायोसिस’ (Adenomyosis) नामक बीमारी होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद डॉक्टरों ने अत्याधुनिक दूरबीन पद्धति से सर्जरी का निर्णय लिया।

डॉक्टरों का शानदार टीम वर्क और वरिष्ठ अधिकारियों का मिला पूर्ण सहयोग
23 मई को यह जटिल सर्जरी स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपक गुप्ता के नेतृत्व में की गई। इस ऑपरेशन को सफल बनाने में निम्नलिखित अधिकारियों और विशेषज्ञों की अहम भूमिका रही:
CMHO का मिला मार्गदर्शन
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. दिनेश खत्री महोदय स्वयं ऑपरेशन थियेटर में मौजूद रहे। उन्होंने पूरी सर्जिकल टीम का उत्साहवर्धन किया और अपना पूर्ण सहयोग प्रदान किया।
सिविल सर्जन के प्रयासों से आई CO2 गैस
दूरबीन की सर्जरी में CO2 गैस की अत्यंत आवश्यकता होती है। सिविल सर्जन डॉ. यशपाल बालियान के व्यक्तिगत प्रयासों से ऐन वक्त पर यह आवश्यक गैस उपलब्ध कराई गई, जिसके कारण यह ऑपरेशन निर्बाध रूप से संपन्न हो सका।
निश्चेतना विशेषज्ञ की अहम भूमिका
निश्चेतना विशेषज्ञ (Anaesthetist) डॉ. अनिल द्वारा मरीज को सटीक जनरल एनेस्थीसिया (General Anaesthesia) दिया गया, जिससे यह जटिल और लंबी सर्जरी पूरी तरह से दर्द रहित और सुरक्षित तरीके से संपन्न हुई।
जिले में पहली बार हुई ‘इंट्रा-कॉर्पोरियल सूचरिंग‘
ऑपरेशन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें जिले में पहली बार ‘इंट्रा-कॉर्पोरियल सूचरिंग’ (शरीर के अंदर ही दूरबीन उपकरणों के माध्यम से टांके लगाने की अत्याधुनिक तकनीक) का सफलतापूर्वक प्रयोग किया गया। यह तकनीक बड़े शहरों के चुनिंदा अस्पतालों में ही देखने को मिलती है।
मरीज के चेहरे पर लौटी मुस्कान
ऑपरेशन पूरी तरह से सफल रहा है और इस नई तकनीक से हुए इलाज के कारण मरीज रजनी अब पूरी तरह स्वस्थ और बेहद प्रसन्न हैं। इस सफलता पर मरीज और उनके परिजनों ने डॉ. दीपक गुप्ता, डॉ. अनिल, CMHO डॉ. दिनेश खत्री, सिविल सर्जन डॉ. यशपाल बालियान सहित पूरे अस्पताल प्रबंधन का हृदय से आभार व्यक्त किया है।
इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि रायसेन जिला अस्पताल अब अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में किसी भी बड़े निजी अस्पताल से कम नहीं है।