सागर। आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य जैनाचार्य श्री समय सागर महाराज का वर्षायोग चातुर्मास मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में होगा। आचार्य संघ का विहार नागपुर से भोपाल की ओर चल रहा है। 19 जुलाई को भोपाल में प्रातःकाल आचार्य संघ की भव्य अगवानी होगी। इस ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनने देशभर से जैन समाज के श्रद्धालु भोपाल पहुंचेंगे। 22 दिन में आचार्य संघ ने 355 किलोमीटर का पैदल बिहार किया है।
मुनि सेवा समिति के सदस्य मुकेश जैन ढाना ने बताया कि आचार्य श्री ससंघ ने 27 जून को तीन माह के प्रवास के बाद नागपुर से भोपाल की ओर विहार प्रारंभ किया था। वर्ष 2026 के वर्षायोग चातुर्मास के लिए लगभग आधा सैकड़ा से अधिक स्थानों के श्रद्धालुओं ने श्रीफल समर्पित कर उन्हें चातुर्मास हेतु आमंत्रित किया था। भोपाल के हबीबगंज में निर्माणाधीन पत्थर के जिनालय का निर्माण कार्य पूर्णता की ओर है। गुरुदेव के संघ में 20 मुनिराज विराजमान हैं।
उन्होंने बताया कि 18 जुलाई को होशंगाबाद रोड स्थित 11 मील पर प्रातःकाल आहारचर्या होगी। इसके पश्चात दोपहर बाद आचार्य संघ का विहार नारायण नगर, भोपाल के लिए होगा, जहां रात्रि विश्राम रहेगा। 19 जुलाई को प्रातःकाल लगभग 4 किमी लंबी पैदल विहार यात्रा के साथ हबीबगंज जैन मंदिर में आचार्य संघ की भव्य अगवानी होगी। इसके लिए पूरे भोपाल में व्यापक तैयारियां चल रही हैं। देश के प्रमुख शहरों एवं प्रदेश के विभिन्न स्थानों से श्रद्धालु भोपाल पहुंच रहे हैं। राजेश जैन और अनिल नैनधरा ने बताया सागर नगर से भी 25 बसें तथा दर्जनों चार पहिया वाहन भोपाल जाएंगे। सभी बसें 18 जुलाई की देर रात भोपाल के लिए रवाना होंगी।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2016 में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज भी कुंडलपुर से सागर होते हुए 18 जुलाई 2016 को भोपाल पहुंचे थे तथा वहीं वर्षायोग चातुर्मास किया था। भोपाल में होने वाले वर्षायोग चातुर्मास को लेकर पूरे देश की जैन समाज की निगाहें टिकी हुई हैं।
गौरतलब है कि वर्ष 2024 में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की समाधि के उपरांत नवाचार्य के रूप में यह आचार्य श्री समय सागर महाराज का तीसरा चातुर्मास है। पहला चातुर्मास खजुराहो तथा दूसरा चातुर्मास जबलपुर में संपन्न हुआ था। राजधानी भोपाल में चातुर्मास होने के कारण विदिशा, खुरई, गैरतगंज, सर्वतोभद्र जिनालय सागर तथा इंदौर सहित विभिन्न स्थानों पर निर्माणाधीन जैन मंदिरों के निर्माण कार्यों में भी और अधिक गति आने की संभावना है।