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आदिवासी अंचल प्रतापगढ़ से गूंजी किसान हुंकार महंगाई और फसल के दामों को लेकर सरकार पर हमला

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सिलवानी रायसेन । मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल इलाके प्रतापगढ़ से आज किसान आक्रोश की बड़ी तस्वीर सामने आई है। किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य खाद-बीज की भारी किल्लत और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर किसान कांग्रेस ने भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। किसानों ने सरकार को किसान विरोधी बताते हुए चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो विधानसभा का घेराव किया जायेगा

सिलवानी आदिवासी विकासखंड के अंतर्गत किसान कांग्रेस की जनआंदोलन यात्रा गुरुवार को प्रतापगढ़ पहुंची। इस दौरान ग्राम प्रतापगढ़, फुलमार छींद, जैथारी, वीकलपुर,चंदन पिपरिया, मंडियां देवरी और मंगरोली सहित कई गांवों में किसानों के साथ चौपाल, आमसभाएं और जनसंवाद किए गए। गांव-गांव से एक ही आवाज उठी कि खेती घाटे का सौदा बन चुकी है और सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। प्रतापगढ़ चौराहे पर आयोजित विशाल किसान आमसभा में केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला गया।

किसान कांग्रेस जिला अध्यक्ष रणजीत सिंह राजा, धर्मवीर वावा, नीलमणि शाह और वीरेंद्र रघुवंशी सहित अन्य नेताओं ने कहा कि गेहूं, चना, मक्का, तुअर, मूंग और धान जैसी फसलों का लागत के अनुरूप मूल्य नहीं मिल रहा है। वहीं डीएपी और यूरिया की भारी किल्लत ने किसानों की कमर तोड़ दी है। ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अजय पटेल ने कहा कि यह सरकार किसानों की नहीं बल्कि उद्योगपतियों की सरकार है। किसान दिन-रात खेत में मेहनत करता है, लेकिन उसे उसकी उपज का सही दाम नहीं मिल पा रहा। किसानों ने वेयरहाउस में तुलाई के नाम पर अवैध वसूली और नहरों के निर्माण में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी लगाए। कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष सिलवानी अजय पटेल का कहना है कि बिना रिश्वत दिए किसान अपनी ही उपज नहीं बेच पा रहा। वेयरहाउस से लेकर मंडियों तक भ्रष्टाचार फैला हुआ है और सरकारी संरक्षण में बिचौलिए किसानों को लूट रहे हैं।

कार्यक्रम में बेरोजगारी, अवैध शराब और रेत कारोबार का मुद्दा भी उठाया गया। किसानों की प्रमुख मांग है कि गेहूं और धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य कम से कम 4 हजार रुपये प्रति क्विंटल किया जाए, जबकि चने की उपज का दाम 8 हजार रुपये प्रति क्विंटल तय किया जाए।
इस मौके पर विधायक देवेंद्र पटेल ने कहा कि महंगाई के कारण आज किसान और आम नागरिक दोनों परेशान हैं। सरकार को गेहूं 4 हजार रुपये प्रति क्विंटल और चना 8 हजार रुपये प्रति क्विंटल सहित अन्य फसलों के दाम बढ़ाने चाहिए, ताकि किसानों को राहत मिल सके। किसान कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया तो आने वाले समय में विधानसभा का घेराव किया जाएगा। आदिवासी अंचल प्रतापगढ़ से उठी इस किसान हुंकार ने सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब देखना होगा कि सरकार किसानों की मांगों पर क्या कदम उठाती है।

 

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