शरद शर्मा बेगमगंज रायसेन
एक पखवाड़े पूर्व जनपद पंचायत के सामने से 80 दुकानदारों को बेदखल करके बेरोजगार किया गया था । जहां पर शॉपिंग शॉपिंग कंपलेक्स बनाया जा रहा है।वहीं नया बस स्टैंड के तीन दिन का नोटिस देकर नगर पालिका परिषद द्वारा 21 दुकानदारों को बेदखल किया गया है। जिसके कारण उनके सामने भी रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है ।
पूर्व में जनपद पंचायत कार्यालय के सामने रखी छोटी-छोटी दुकानों में चाय पान ,मैकेनिक , कोल्डड्रिंक शाप , फल विक्रेता , सहित अन्य कार्यों में लिप्त दुकानदारों की दुकाने थी ।
रिक्त स्थान पर भी जनपद पंचायत द्वारा शॉपिंग कांप्लेक्स निर्माण कराया जा रहा है। जिसके तहत डेढ़ से ऊपर दुकान निर्मित होने का बताया गया है।
वही पिछले 40 वर्षों से नया बस स्टैंड पर चाय पान कोल्ड ड्रिंक शॉप , भोजनालय , किराना , खिलौने , दवाई , मैकेनिक , टायर पंचर सहित एवं अन्य छोटे -छोटे व्यवसाय करने वाले 21 दुकानदारों को तीन दिन पूर्व नोटिस देकर अपने -अपने अतिक्रमण हटाने की चेतावनी दी गई थी।
नोटिस मिलने के बाद दुकानदारों ने मप्र उच्च न्यायालय जबलपुर की शरण ली लेकिन नगरपालिका परिषद द्वारा भी इस संबंध में लगाई गई कैवियट के कारण सुनवाई नहीं हो सकी क्योंकि की हाईकोर्ट जबलपुर द्वारा सभी पक्षकारों को कैविएट के संबंध में नोटिस दिए गए हैं , जो संभवतः तामील भी हो गए हैं। लेकिन दुकानदारों की याचिका पर सुनवाई नहीं होकर पेशी जनवरी माह में लग गई है।मप्र हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद ही कुछ हल निकलने की उम्मीद बताई जा रही है।
मप्र हाईकोर्ट जबलपुर से फिलहाल राहत नहीं मिलने से निराश हुए सभी दूकानदारों ने स्वेच्छा से शांति पूंर्ण ढ़ंग से अपना अतिक्रमण हटाते हुए अपनी -अपनी दुकानों का सामान कहीं और जगह नहीं मिलने से निराश होकर बेरोजगार हुए दुकानदार सामान भरकर अपने घर ले गए हैं।
नगर पालिका परिषद सीएमओ राजेंद्र शर्मा द्वारा बताया गया है कि नया बस स्टैंड पर हटाए गए अतिक्रमण के स्थान पर शॉपिंग कंपलेक्स बनाया जाएगा। जिसमें प्रभावित दुकानदारों को भी दुकान दी जाएगी। 2005 में 15 दुकानदार मप्र हाईकोर्ट जबलपुर गए थे लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली थी , तब नगरपालिका द्वारा ही अतिक्रमण नहीं हटाया गया था।
लेकिन अब शॉपिंग शॉपिंग कंपलेक्स का निर्माण कराया जा रहा है । जिससे कि डेढ़ सौ से ऊपर बेरोजगार व्यवसाईयों को रोजगार मिलेगा ।इसके साथ ही हटाए गए विस्थापित दुकानदारों के पुनर्वास किए जाने की योजना है।